Ujjain Aghori News : धर्मनगरी उज्जैन के श्मशान का रहस्यमयी अघोरी, हाथ में खोपड़ी और चारों तरफ आग, 26 महीने से खड़े होकर कर रहे हैं ऐसी साधना
उज्जैन के चक्र तीर्थ श्मशान घाट पर एक अघोरी साधक की कठोर तपस्या इन दिनों चर्चा में है। भीषण गर्मी में घंटों खड़े रहकर की जा रही यह साधना लोगों को हैरान कर रही है।
Ujjain Aghori News / Image Source : IBC24
- उज्जैन के चक्र तीर्थ श्मशान में अघोरी साधक की तपस्या चर्चा में
- उज्जैन के चक्र तीर्थ श्मशान में अघोरी साधक की तपस्या चर्चा में
- कपाल और अग्नि के बीच “अष्ट ध्वनि तपस्या” का पालन
उज्जैन : मध्य प्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन एक बार फिर अपनी रहस्यमयी साधना और तांत्रिक परंपराओं को लेकर चर्चा में है। चक्र तीर्थ श्मशान घाट पर इन दिनों एक अघोरी साधक कड़ी तपस्या में लीन है। भीषण गर्मी के बीच दोपहर की तेज धूप में खड़े होकर की जा रही यह साधना लोगों के बीच आकर्षण और कौतूहल का विषय बनी हुई है। बताया जा रहा है कि अघोरी साधक प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक, यानी करीब 3 घंटे तक कठोर तप करता है।
साधना के दौरान धारण करते है कपाल
इस दौरान वह पेड़ के सहारे खड़े होकर साधना करता है और हाथ में मुर्दे का कपाल (खोपड़ी) धारण करता है। साधना से पहले वह अपने चारों ओर कंडों (उपलों) की चौकी बनाता है, जिसे जलाकर अग्नि प्रज्ज्वलित की जाती है। इसके बाद वह शरीर पर श्मशान की राख का लेप कर तपस्या में लीन हो जाता है। इस साधना को “अष्ट ध्वनि तपस्या” बताया जा रहा है, जिसमें साधक अपने चारों ओर अग्नि प्रज्वलित कर उसके मध्य खड़े होकर ध्यान करता है।
शांति और आत्माओं की मोक्ष प्राप्ति के उद्देश्य से साधना
साधना कर रहे खड़ेश्वर योगी विष्णुनाथ अघोरी के अनुसार यह तपस्या जनकल्याण, विश्व शांति और आत्माओं की मोक्ष प्राप्ति के उद्देश्य से की जा रही है। उन्होंने बताया कि यह परंपरा उनके गुरु परम तपस्वी योगी बाबा बम-बम नाथ जी महाराज से मिली है, जिनके मार्गदर्शन में वे इस कठिन साधना का पालन कर रहे हैं। अघोरी साधक ने यह भी बताया कि उन्होंने 12 वर्षों तक खड़े रहकर तपस्या करने का संकल्प लिया है, जिसमें से वे पिछले 25-26 महीनों से निरंतर खड़े होकर साधना कर रहे हैं। उनका यह संकल्प है कि वे उज्जैन नहीं छोड़ेंगे और यहीं रहकर अपनी साधना पूर्ण करेंगे।
वर्षों से कर रहे तपस्या
साधना में उपयोग किया जा रहा कपाल उनके गुरु द्वारा सिद्ध किया हुआ बताया गया है, जिसका उपयोग वे तांत्रिक क्रियाओं और साधना में करते हैं। चक्र तीर्थ श्मशान को तंत्र साधना के लिए विशेष महत्व का स्थान माना जाता है, जहां वर्षों से साधक इस प्रकार की कठिन तपस्या करते आ रहे हैं।
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