ujjain borewell/ image source: ibc24
Ujjain Borewell Hadsa: उज्जैन: मध्य प्रदेश के Ujjain जिले से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां झलारिया गांव में 3 साल का एक मासूम खेलते-खेलते खुले पड़े बोरवेल में गिर गया। जानकारी के अनुसार बच्चा करीब 60 से 70 फीट की गहराई में फंसा हुआ है। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और रेस्क्यू टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं और बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर अभियान शुरू कर दिया गया। गांव में इस घटना के बाद अफरा-तफरी का माहौल है और हर किसी की नजर रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हुई है।
रेस्क्यू टीमों को उसे सुरक्षित बाहर निकालने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। SDRF की टीम को आशंका है कि बचाव के दौरान जरा सी चूक होने पर बच्चा दोबारा नीचे गिर सकता है, इसलिए ऑपरेशन बेहद सावधानी के साथ किया जा रहा है। फिलहाल टीम ने पतली रेलिंग के सहारे भागीरथ को करीब 40 फीट तक ऊपर लाने में आंशिक सफलता हासिल की है, लेकिन उसे पूरी तरह बाहर निकालना अभी भी चुनौती बना हुआ है। इसी बीच प्रशासन ने नया प्लान तैयार करते हुए बोरवेल के पास ही अल्टरनेट रूट बनाने का फैसला लिया है, जिसके तहत केनाल के माध्यम से करीब 25 फीट गहरी खुदाई की जा रही है ताकि समानांतर रास्ते से बच्चे तक सुरक्षित पहुंच बनाई जा सके। साथ ही, बोरवेल के रास्ते से भी उसे बाहर निकालने के प्रयास लगातार जारी हैं, और पूरा ऑपरेशन समय के खिलाफ जंग बन गया है।
बच्चे को जल्द से जल्द बाहर निकालने के लिए प्रशासन ने भारी मशीनों की मदद भी ली है। मौके पर 3 पोकलेन मशीनें और बुलडोजर लगाए गए हैं, जिनकी सहायता से समानांतर गड्ढा खोदकर बच्चे तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। कलेक्टर, एसपी सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद हैं और पूरे ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं। रेस्क्यू टीम लगातार प्रयास कर रही है कि बिना किसी जोखिम के बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
गौरतलब है कि इससे पहले भी मध्य प्रदेश में इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 29 दिसंबर 2024 को Guna जिले के पिपलिया गांव में 10 वर्षीय सुमित मीना 140 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया था। उस समय National Disaster Response Force (NDRF) द्वारा करीब 15 घंटे तक चले कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। हालांकि उसकी हालत गंभीर थी और उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उज्जैन की इस ताजा घटना ने एक बार फिर खुले बोरवेल की समस्या और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।