नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) भारत और दक्षिण कोरिया ने सोमवार को व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को अद्यतन करने के लिए बातचीत का अगला दौर शुरू किया। यह समझौता जनवरी, 2010 में लागू हुआ था। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
तीन दिन तक चलने वाली ये बातचीत (25-27 मई) महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत ने दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं।
सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘‘यह भारत-कोरिया सीईपीए अद्यतन बातचीत का 12वां दौर है।’’
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 20 अप्रैल को अपने कोरियाई समकक्ष येओ हान-कू को एक नया द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) करने पर विचार करने का प्रस्ताव दिया था। इसका मकसद समझौते को और अधिक समकालीन बनाना और व्यापार घाटे—यानी आयात और निर्यात के बीच के अंतर—को लेकर चिंताओं को दूर करना है।
दक्षिण कोरिया को भारत का निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 के 5.81 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 3.31 प्रतिशत की वृद्धि के साथ छह अरब डॉलर हो गया। वित्त वर्ष 2022-25 के दौरान निर्यात में वृद्धि नकारात्मक रही थी।
आयात वित्त वर्ष 2024-25 के 21 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 1.38 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 21.35 अरब डॉलर हो गया।
व्यापार घाटा 2025-26 में 15.35 अरब डॉलर, 2024-25 में 15.2 अरब डॉलर, 2023-24 में 14.71 अरब डॉलर, 2022-23 में 14.57 अरब डॉलर और 2021-22 में 9.4 अरब डॉलर रहा।
गोयल ने कहा कि मूल सीईपीए, भारत के पक्ष में काम नहीं कर पाया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय निर्यातकों को दक्षिण कोरिया में कुछ गैर-शुल्क बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इनमें कड़े मानक, नियम और प्रमाणन संबंधी आवश्यकताएं शामिल हैं, जिनके कारण भारतीय सामान के लिए दक्षिण कोरियाई बाजार में अपनी जगह बनाना मुश्किल हो जाता है।
दोनों देशों का लक्ष्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा के 27 अरब डॉलर से बढ़ाकर 54 अरब डॉलर तक दोगुना करना है, साथ ही एक अधिक संतुलित व्यापार संबंध सुनिश्चित करना भी है।
भाषा राजेश राजेश अजय
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