जब बशीर बद्र अपनी ही शायरी पर पूछे गए सवाल का जवाब देकर भी परीक्षक को नहीं कर सके संतुष्ट

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जब बशीर बद्र अपनी ही शायरी पर पूछे गए सवाल का जवाब देकर भी परीक्षक को नहीं कर सके संतुष्ट

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  • Publish Date - May 29, 2026 / 12:01 AM IST,
    Updated On - May 29, 2026 / 12:01 AM IST

भोपाल, 28 मई (भाषा) उर्दू के मशहूर शायर बशीर बद्र अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में जब छात्र थे, तब वह एक मौखिक परीक्षा में विफल हो गए थे। इसकी वजह यह थी कि परीक्षक ने उनसे कुछ पंक्तियों की व्याख्या करने को कहा था और वह, बद्र साहब के जवाब से असहमत थे जबकि उन पंक्तियों के असली रचनाकार स्वयं बशीर बद्र ही थे।

पद्मश्री से सम्मानित बशीर बद्र का लंबी बीमारी के बाद बृहस्पतिवार को भोपाल में निधन हो गया। वह 91 वर्ष के थे। दिग्गज कवि ने भोपाल में अपने घर पर अंतिम सांस ली।

उर्दू का यह महान कवि अपने पीछे एक अपनी रचनाओं, शायरियों और कविताओं का ऐसा खजाना छोड़ गया है, जो भी आज रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई हैं और यादों में बस चुकी हैं।

बशीर बद्र के बेटे तैयब ने बताया कि उनके पिता जब युवा थे तब उन्होंने आधुनिक उर्दू ग़ज़ल और साहित्य में उच्च अध्ययन के लिए दाखिला के लिए नामांकन किया था।

तैयब ने बताया कि एएमयू के उस प्रोफेसर ने बद्र से ‘अब हम मिलेंगे तो कई लोग बिछड़ जाएंगे, इंतजार और करो मेरा आगे जन्म का’ का अर्थ समझाने को कहा था।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘अब्बा जी ने मौखिक परीक्षा के दौरान परीक्षक को बगैर यह बताए कि वे खुद ही इन पंक्तियों के लेखक हैं, उसका अर्थ बताया।… लेकिन उन्हें आश्चर्य हुआ कि परीक्षक उनके स्पष्टीकरण से पूरी तरह असहमत थे।’’

उन्होंने कहा कि बशीर बद्र साहब परीक्षा में असफल रहे, लेकिन समकालीन भारत में सबसे प्रभावशाली और अक्सर उद्धृत उर्दू कवियों में से एक बनने में सफल रहे।

उन्होंने बताया कि इन पंक्तियों को क्रांतिकारी माना जाता था क्योंकि बद्र साहब ने एकतरफा प्यार को व्यक्त करने के लिए ‘अगले जन्म’ का उल्लेख किया था जो कि पारंपरिक इस्लामी मान्यता के खिलाफ था कि जीवन के बाद ‘आखिरत’ (न्याय का दिन) होता है।

आखिरत एक अरबी शब्द है, जिसका अर्थ ‘परलोक’ या ‘मृत्यु के बाद का जीवन’ होता है। इस्लाम के अनुसार आखिरत वह जीवन है जो इस दुनिया की जिंदगी खत्म होने के बाद शुरू होता है। यह वह समय है जब इंसान के कर्मों का हिसाब होता है।

भाषा ब्रजेन्द्र शोभना

शोभना