आदिवासी समाज के लिए संहिता की मांग की लड़ाई जारी रखेंगे : उमंग सिंघार

आदिवासी समाज के लिए संहिता की मांग की लड़ाई जारी रखेंगे : उमंग सिंघार

आदिवासी समाज के लिए संहिता की मांग की लड़ाई जारी रखेंगे : उमंग सिंघार
Modified Date: August 9, 2026 / 07:10 pm IST
Published Date: August 9, 2026 7:10 pm IST

भोपाल, नौ अगस्त (भाषा) कांग्रेस नेता और मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने रविवार को कहा कि राज्य की 22 प्रतिशत से अधिक आबादी आदिवासी समाज की है और वह इस समुदाय के लिए अलग संहिता की मांग को लेकर संघर्ष करते रहेंगे।

सिंघार ने विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राजधानी भोपाल के दशहरा मैदान में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेशभर से आए आदिवासी समाज के लोगों को संबोधित करते हुए यह बात कही।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज भीख नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की मांग कर रहा है।

मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के 22 से अधिक आदिवासी संगठनों ने भाग लिया। बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में कार्यक्रम में शामिल हुए और ढोल-मांदल की थाप पर नृत्य किया।

मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष सिंघार ने कहा कि वह इस कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष के रूप में नहीं, बल्कि समाज का हिस्सा होने के नाते शामिल हुए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मध्यप्रदेश में 22 प्रतिशत से अधिक आबादी आदिवासी समाज की है, लेकिन आज भी उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। उनकी पहचान और अस्तित्व को खत्म करने के प्रयास किए जा रहे हैं।’’

सिंघार ने कहा कि आदिवासी समाज को अपनी पहचान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर काम करना होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं स्वयं आदिवासी समाज से आता हूं और मुझे पता है कि आदिवासी गांवों में लोग किन कठिन परिस्थितियों में जीवनयापन कर रहे हैं।’’

कांग्रेस नेता ने कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में आदिवासियों के लिए अलग कोड की व्यवस्था थी, तो आज आदिवासी समाज को अपना आदिवासी कोड (संहिता) क्यों नहीं मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह मध्यप्रदेश के 22 प्रतिशत से अधिक आदिवासी समाज की मांग है और इसे मजबूती से उठाया जाएगा।

सिंघार ने कहा, ‘‘हम आदिवासी समाज के लिए आदिवासी कोड की लड़ाई लड़ेंगे। हमें आने वाली पीढ़ी को आदिवासी कोड देना है। भले ही मैं किसी राजनीतिक दल से जुड़ा हूं, लेकिन आदिवासी अधिकारों की बात एक बार नहीं, बल्कि 100 बार करूंगा।’’

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज स्वाभिमानी समाज है और वह अपने अधिकारों की मांग कर रहा है, भीख नहीं मांग रहा है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मध्यप्रदेश का आदिवासी युवा अब जागरुक हो चुका है और वह अपने अधिकारों, पहचान और भविष्य को लेकर सजग है। उन्होंने आदिवासी समाज से अपनी संस्कृति, परंपरा, पहचान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।

गौरतलब है कि हर साल नौ अगस्त को अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस मनाया जाता है। यह दिन आदिवासी समुदायों की समृद्ध संस्कृति, इतिहास और उनके अधिकारों के संरक्षण के प्रति जागरुकता बढ़ाने के उद्देश्य से समर्पित है।

भाषा

ब्रजेन्द्र रवि कांत


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