‘लाडकी बहिन’ योजना से 80 लाख महिलाएं बाहर, मुख्यमंत्री ने अपात्रों को बाहर किए जाने की बात कही

‘लाडकी बहिन’ योजना से 80 लाख महिलाएं बाहर, मुख्यमंत्री ने अपात्रों को बाहर किए जाने की बात कही

‘लाडकी बहिन’ योजना से 80 लाख महिलाएं बाहर, मुख्यमंत्री ने अपात्रों को बाहर किए जाने की बात कही
Modified Date: June 1, 2026 / 09:38 pm IST
Published Date: June 1, 2026 9:38 pm IST

मुंबई, एक जून (भाषा) मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना के लिए ऑनलाइन माध्यम से केवाईसी (उपभोक्ता को जानो) की अंतिम तिथि बीत जाने के बाद 80 लाख महिलाएं इस योजना से बाहर हो गई हैं। इसे लेकर विपक्षी दलों ने तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार ‘‘गंभीर वित्तीय संकट’’ के कारण लाभार्थियों को योजना से बाहर कर रही है।

हालांकि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया कि सरकार ने लाखों महिलाओं को नकद हस्तांतरण योजना से बाहर कर दिया है। फडणवीस ने जोर देकर कहा कि सत्यापन प्रक्रिया के माध्यम से केवल अपात्र लाभार्थियों को ही बाहर किया गया है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को कहा कि 30 अप्रैल की ‘ई-केवाईसी’ समयसीमा के बाद लाभार्थियों की संख्या 2.4 करोड़ से घटकर करीब 1.7 करोड़ रह गई है, लेकिन यह कटौती केवल ‘ई-केवाईसी’ न कराने के कारण नहीं, बल्कि पात्रता मानदंडों का पालन न करने से भी जुड़ी है।

उन्होंने बताया कि सरकार ने लाभार्थियों को ई-केवाईसी पूरी करने के लिए आठ महीने का समय दिया था।

अधिकारी ने कहा, ‘‘करीब 50 से 55 लाख महिलाओं ने यह प्रक्रिया पूरी ही नहीं की, जबकि दो से तीन लाख लोगों ने इस दौरान अपनी त्रुटियां सुधारीं। इसके अलावा, करीब 12 लाख महिलाएं आयकर दाता पाई गईं, जो 2.5 लाख रुपये की वार्षिक आय सीमा से अधिक हैं और 4.5 लाख से अधिक महिलाएं 65 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा पार कर चुकी थीं।’’

उन्होंने यह भी बताया कि करीब पांच लाख महिलाएं पहले से ‘नमो शेतकरी’ योजना का लाभ उठा रही हैं।

‘ई-केवाईसी’ पूरी करने के बावजूद मासिक किस्त न मिलने की शिकायतों पर अधिकारी ने कहा, ‘‘वास्तविक लाभार्थियों की अंतिम संख्या एक सप्ताह में स्पष्ट हो जाएगी और शिकायतों का पुन: सत्यापन किया जा रहा है।’’

उन्होंने यह भी खारिज किया कि 80 लाख महिलाओं को केवल ई-केवाईसी न कराने के आधार पर योजना से हटाया गया है।

फडणवीस ने कहा कि सरकार ने प्रमुख कल्याणकारी योजना से किसी भी पात्र महिला को बाहर नहीं किया है और इस बात पर जोर दिया कि सत्यापन प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि लाभ केवल पात्र लाभार्थियों तक ही पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने मुंबई में एक क्षेत्रीय समाचार चैनल द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘हमने किसी को भी बाहर नहीं रखा है। पात्रता के लिए कई मानदंड थे। हमने केवाईसी प्रक्रिया शुरू की और उन लाभार्थियों की पहचान की जो या तो अपात्र थे या जिनके रिकॉर्ड में विसंगतियां थीं।”

मुख्यमंत्री के अनुसार, सत्यापन प्रक्रिया से पता चला कि लगभग 14,000 पुरुष, पांच लाख सरकारी कर्मचारी, 10 लाख आयकरदाता और पांच लाख वाहन मालिक पात्रता शर्तों को पूरा न करने के बावजूद लाभ प्राप्त कर रहे थे।

फडणवीस ने बताया कि अनिवार्य केवाईसी प्रक्रिया पूरी न करने वाले और अपात्र पाए गए लाभार्थियों को योजना के तहत भुगतान प्राप्त करने से रोक दिया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 25 लाख महिला लाभार्थियों के केवाईसी विवरण में भी त्रुटियां पाई गईं और इन रिकॉर्डों को बाद में ठीक कर लिया गया।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार केवाईसी प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने के लिए तैयार है। हालांकि, जो लोग इसके लिए अपात्र हैं, उन्हें इस योजना के तहत कोई पैसा नहीं मिलेगा।’’

वहीं, विपक्षी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) नेता जयंत पाटिल ने दावा किया कि योजना से लाभार्थियों को हटाना राज्य के ‘‘गंभीर वित्तीय संकट’’ को दर्शाता है।

पाटिल ने आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनावों में सत्तारूढ़ महायुति के खराब प्रदर्शन के बाद और विधानसभा चुनावों से पहले इस योजना को लागू किया गया था जिसके तहत महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक सहायता दी जाती है।

पाटिल ने कहा, ‘‘अब 80 लाख महिला लाभार्थियों को अपात्र घोषित कर दिया गया है। यह उन्हीं लोगों को धोखा देना है, जिन्हें सहायता का वादा किया गया था।’’

उन्होंने इसे राज्य सरकार पर बढ़ते वित्तीय बोझ का संकेत बताया और कहा, ‘‘केंद्र के बाद अब राज्य भी गंभीर वित्तीय संकट में है। पहली मार हमारी ‘लाडकी बहिनों’ पर पड़ी है। राज्य का राजकोषीय घाटा काफी अधिक है और वैश्विक आर्थिक मंदी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है।’’

राकांपा (शप) विधायक रोहित पवार ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार लाडकी बहिन योजना को धीरे-धीरे बंद करने के इरादे से लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से हटा रही है।

पवार ने एक बयान में दावा किया कि विधानसभा चुनावों से पहले योजना में 2.47 करोड़ लाभार्थी थीं, जबकि अब करीब 81 लाख महिलाओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘केवाईसी तो बस एक बहाना है। असली मकसद लाभार्थियों को अलग-अलग चरणों में हटाकर योजना को बंद करना है।’’

साथ ही उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि महिला लाभार्थियों से धनराशि वापस लेने या उन्हें परेशान करने की कोशिश की गई तो कड़ा विरोध होगा।

संवाददाताओं से बातचीत में कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने महायुति सरकार पर योजना के लाभार्थियों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल वोट हासिल करने के मकसद से शुरू की गई थी।

उन्होंने चेतावनी दी कि महिलाओं को नाराज और निराश करने की कीमत सत्तारूढ़ गठबंधन को चुकानी पड़ेगी।

राकांपा (शप) की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि चुनावी अवधि के दौरान लाभार्थियों का उचित सत्यापन किए बिना जल्दबाजी में इस योजना को लागू किया गया था।

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यह हैरानी की बात है कि सरकार को करीब डेढ़ साल बाद यह एहसास हुआ कि 80 लाख महिलाएं कथित रूप से इस योजना के लिए पात्र नहीं थीं। इससे पता चलता है कि राजनीतिक, प्रशासनिक और क्रियान्वयन—तीनों स्तरों पर सरकार की गंभीर सामूहिक विफलता रही है। यह योजना करदाताओं के रुपये से क्रियान्वित की जा रही है। ऐसे में एक अहम सवाल उठता है कि क्या सरकार पिछले डेढ़ साल से अपात्र लाभार्थियों को जनता का धन बांट रही थी?’’

शिवसेना (उबाठा) के नेता आदित्य ठाकरे ने देवेंद्र फडणवीस सरकार पर दिखावटी योजनाओं के क्रियान्वयन का आरोप लगाया।

उन्होंने दावा किया कि सरकार ने शुरुआत में महिलाओं को मिलने वाली मासिक सहायता राशि बढ़ाने का वादा किया था, लेकिन अब उल्टे 80 लाख से अधिक लाभार्थियों को अपात्र घोषित कर दिया है।

भाषा

संतोष वैभव

वैभव


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