मुंबई, पांच फरवरी (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने जेल में बंद गैंगस्टर अबू सलेम की पैरोल अर्जी बृहस्पतिवार को खारिज कर दी, क्योंकि उसने पुलिस सुरक्षा शुल्क का भुगतान करने में असमर्थता जताई थी।
सलेम 1993 के मुंबई बम धमाकों के मामले में 25 साल की जेल की सजा काट रहा है। उसने अपने भाई अबू हकीम अंसारी की मृत्यु पर शोक व्यक्त के लिए उत्तर प्रदेश स्थित अपने पैतृक निवास स्थान जाने के वास्ते आपातकालीन पैरोल की अर्जी दी थी।
न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति श्याम चांडक की खंडपीठ ने सलेम की अर्जी खारिज कर दी, क्योंकि उसके वकील ने दलील दी कि वह राज्य कारागार अधिकारियों द्वारा निर्धारित उच्च सुरक्षा शुल्क का भुगतान करने में असमर्थ है।
पिछली सुनवाई में उसके वकील ने अदालत को बताया था कि सलेम सुरक्षा शुल्क के तौर पर एक लाख रुपये से अधिक का भुगतान नहीं कर पाएगा। अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि वह ‘‘सौदेबाजी नहीं कर सकता’’ और अगर वह जाना चाहता है तो उसे अनिवार्य शुल्क का भुगतान करना ही होगा।
सलेम ने दिसंबर 2025 में दायर अपनी अर्जी में पैरोल का अनुरोध किया था क्योंकि उसके बड़े भाई अबू हकीम अंसारी की नवंबर में मृत्यु हो गई थी।
उसने कहा था कि अदालत की क्रिसमस की छुट्टियों के कारण उसकी अर्जी में देरी हुई।
सलेम की अर्जी के अनुसार, उसने पिछले साल 15 नवंबर को अपने दिवंगत भाई के अंतिम संस्कार और संबंधित रस्मों में शामिल होने के लिए जेल अधिकारियों के समक्ष 14 दिन की आपातकालीन पैरोल के लिए आवेदन किया था। हालांकि, जेल अधिकारियों ने 20 नवंबर के एक आदेश द्वारा उसका आवेदन खारिज कर दिया था।
सलेम ने बताया कि नवंबर 2005 में अपनी गिरफ्तारी के बाद से वह जेल में ही है और उसे अपनी मां और सौतेली मां की मृत्यु के बाद ही कुछ दिनों की पैरोल मिली थी।
वर्ष 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में दोषी करार दिये गए सलेम को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से प्रत्यर्पित करा कर भारत लाया गया था।
एक विशेष टाडा अदालत ने 1995 में मुंबई के बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या के एक अन्य मामले में सलेम को अलग से आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
भाषा सुभाष पवनेश
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