अदालत ने अबू सलेम की पैरोल अर्जी पर कहा-सुरक्षा शुल्क चुकाने पर कोई मोलभाव नहीं किया जा सकता

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अदालत ने अबू सलेम की पैरोल अर्जी पर कहा-सुरक्षा शुल्क चुकाने पर कोई मोलभाव नहीं किया जा सकता

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  • Publish Date - February 3, 2026 / 09:26 PM IST,
    Updated On - February 3, 2026 / 09:26 PM IST

मुंबई, तीन फरवरी (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि अदालत जेल में बंद माफिया सरगना अबू सलेम को उत्तर प्रदेश स्थित उसके पैतृक नगर जाने के लिए पैरोल देने के पक्ष में नहीं है क्योंकि सलेम के वकील ने पुलिस सुरक्षा के भारी-भरकम शुल्क का भुगतान करने में असमर्थता जताई है।

न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति श्याम चंदक की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि वह 17 लाख रुपये से अधिक के सुरक्षा शुल्क पर कोई समझौता नहीं कर सकती।

वर्ष 1993 के मुंबई बम धमाकों के मामले में 25 साल की सजा काट रहे सलेम ने अपने भाई अबू हकीम अंसारी की मौत पर शोक व्यक्त करने के लिए आजमगढ़ जिले में अपने पैतृक नगर जाने के लिए पैरोल का अनुरोध किया था।

अदालत ने पहले सुझाव दिया था कि सलेम आवश्यक शुल्क का भुगतान स्वयं करने के बाद पुलिस सुरक्षा के तहत पैरोल का लाभ उठा सकता है।

सलेम की वकील फरहाना शाह ने मंगलवार को अदालत को बताया कि सुरक्षा शुल्क ‘अत्यधिक’ है और उनका मुवक्किल कई वर्षों से जेल में है तथा उसकी आर्थिक स्थिति ‘खराब’ है।

अधिकारियों ने नासिक रोड केंद्रीय जेल में बंद सलेम को गृह नगर जाने के लिए पुलिस सुरक्षा दल के लिए 17 लाख रुपये से अधिक का भुगतान करने को कहा है।

हालांकि, शाह ने अदालत को बताया कि सलेम एक लाख रुपये से अधिक का भुगतान नहीं कर पाएगा।

इस पर, खंडपीठ ने जोर देकर कहा कि अदालत ‘मोलभाव नहीं कर सकती’ और अगर वह पुलिस सुरक्षा में अपने गृह नगर जाना चाहता है तो उसे अनिवार्य शुल्क का भुगतान करना ही होगा।

इसके बाद अदालत ने उनके वकील से पैरोल याचिका वापस लेने को कहा, नहीं तो इसे खारिज कर दिया जाएगा।

मुवक्किल से निर्देश लेने के लिए समय दिए जाने के वकील के अनुरोध के बाद मामले को बृहस्पतिवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

सलेम ने दिसंबर 2025 में याचिका दायर कर पैरोल का अनुरोध किया था ताकि वह अपने पैतृक स्थान जा सके, क्योंकि उसके बड़े भाई अंसारी की नवंबर में मौत हो गई थी।

भाषा जितेंद्र नेत्रपाल

नेत्रपाल