तृणमूल सांसदों पर हमले के बाद, शिवसेना (उबाठा) ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन की मांग की
तृणमूल सांसदों पर हमले के बाद, शिवसेना (उबाठा) ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन की मांग की
मुंबई, एक जून (भाषा) पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर कथित हमलों को लेकर शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए शिवसेना (उबाठा) ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सोमवार को मांग की।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के मुखपत्र ‘सामना’ में ‘बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करो’ शीर्षक से एक संपादकीय में कहा गया है कि दो सांसदों पर हमला न केवल पश्चिम बंगाल की प्रतिष्ठा के लिए बल्कि देश के लिए भी एक बड़ा झटका है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 208 सीटों पर जीत के साथ ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया।
दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में शनिवार को डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी पर एक उग्र भीड़ ने पत्थर और अंडे फेंके। कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि रविवार को हुगली जिले में एक थाने के सामने भीड़ के हमले में उनके सिर में चोटें आईं।
‘सामना’ के संपादकीय में आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा नीत सरकार ने गुंडों को खुली छूट दे दी है और वह विपक्षी दल के जन प्रतिनिधियों को मारना चाहती है।
संपादकीय में दावा किया गया कि चूंकि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एन रवि ने इस हमले पर कोई बयान नहीं दिया है, इसका मतलब है कि ये ‘‘जानलेवा’’ हमले भाजपा द्वारा प्रायोजित थे।
इसमें कहा गया कि अगर ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री रहते ऐसे हमले हुए होते, तो पश्चिम बंगाल के राज्यपाल राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर देते। संपादकीय में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में नव-हिंदुत्व का उभार हो रहा है।
शिवसेना (उबाठा) ने आरोप लगाया है कि भाजपा तृणमूल कांग्रेस को तोड़कर पश्चिम बंगाल में गुंडों का राज कायम करना चाहती है। पार्टी ने कहा कि भाजपा जनता के कल्याण के लिए सत्ता का इस्तेमाल करने के बजाय अपनी बदले की भावना को पूरा करने के लिए काम कर रही है।
भाषा आशीष नरेश
नरेश

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