मुंबई, 19 जून (भाषा) शिवसेना (उबाठा) के छह लोकसभा सदस्यों की बगावत के बीच, उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को भावुक होते हुए कहा कि चुनौतियों और हमलों के बावजूद उनका संकल्प नहीं डगमगाया है, लेकिन अगर पार्टी को उन पर भरोसा और विश्वास नहीं है, तो वह इसके अध्यक्ष का पद छोड़ने को तैयार हैं।
चार साल में दूसरी बार अपनी पार्टी में आसन्न टूट पर, ठाकरे ने कहा कि वह एक दशक से अधिक समय से पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं और लगातार हो रहे हमलों को देखते हुए वह शिवसेना (उबाठा) के शीर्ष पद से हटने को तैयार हैं।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ठाकरे मुंबई में शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
भावुक ठाकरे ने अपने समर्थकों से कहा, ‘‘अगर पार्टी का ही कोई व्यक्ति अगला शिवसेना प्रमुख बनता है तो मुझे खुशी होगी, लेकिन मैं इसे चोरों के हाथों में नहीं जाने दूंगा।’’
ठाकरे ने कहा कि वह डगमगाए नहीं हैं और सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए डटे हुए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मैं नहीं चाहता कि कोई भी शिवसैनिक मुझ पर उंगली उठाए कि मैंने मुख्यमंत्री पद से (2022 में) इस्तीफा दे दिया और (2026 में) विधान परिषद की सदस्यता जारी नहीं रखी।’’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल की घटनाओं से शिवसेना (उबाठा) के कार्यकर्ता निराश नहीं हुए, बल्कि और अधिक जोश में आ गए हैं।
उन्होंने बागी सांसदों के उन दावों की कड़ी आलोचना की, जिनमें कहा गया था कि उन्हें आशंका है कि शिवसेना (उबाठा) कांग्रेस में अपना विलय कर सकती है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर 30 साल तक सहयोगी रहने के बावजूद हमने भाजपा में अपना विलय नहीं किया, तो हम कांग्रेस में विलय कैसे कर सकते हैं? मुझे आशंका है कि भाजपा की महाराष्ट्र इकाई (एकनाथ) शिंदे नीत शिवसेना का (खुद में) विलय कर सकती है।’’
भाषा सुभाष अविनाश
अविनाश