अमरावती, 17 मई (भाषा) आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने झींगा को खिलाए जाने वाले चारे की बढ़ती कीमत को लेकर व्यापत चिंता के बीच मत्स्यपालन किसानों के हित में उपाय सुझाने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा।
राज्य सरकार ने यहां सचिवालय में विशेष मुख्य सचिव बी. राजशेखर की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से मछली के चारे के निर्यात पर प्रोत्साहन और सोया आयात पर प्रतिबंध जैसे मुद्दों को लेकर केंद्रीय मंत्री से अपील करने का निर्णय लिया।
शनिवार देर रात जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, “मुख्यमंत्री नायडू ने झींगा के चारे की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर मत्स्यपालन किसानों के हित में कदम उठाने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा।”
अधिकारियों के अनुसार, बैठक में मत्स्यपालन क्षेत्र पर चारे की कीमतों में वृद्धि के प्रभाव और राज्य भर में झींगा पालकों द्वारा सामना की जा रही समस्याओं पर चर्चा की गई।
मत्स्य आयुक्त रामाशंकर नाइक ने राज्य में मत्स्यपालन की वर्तमान स्थिति के बारे में विस्तार से बताया, जिसमें झींगा उत्पादन, चारे की खपत, मौजूदा चारे की कीमतें और विनिर्माण कंपनियों द्वारा प्रस्तावित वृद्धि शामिल हैं।
‘सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ ब्रेकिशवॉटर एक्वाकल्चर’ (सीआईबीए) के वैज्ञानिकों ने बताया कि मछली/झींगा पालन में इस्तेमाल होने वाले मुख्य कच्चे माल जैसे कि सोया, ‘फिश मील’(मछलियों से बना प्रोटीन पाउडर, जो मछलियों के लिए चारे के रूप में इस्तेमाल होता है) आदि की कीमतों में जनवरी से मई 2026 के बीच तीव्र वृद्धि हुई है।
उन्होंने बताया कि कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के कारण मछलियों के चारे के उत्पादन की लागत में औसतन 31.03 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई है।
अधिकारी ने वैकल्पिक स्रोतों के उपयोग का सुझाव दिया।
चारा उत्पादन कंपनियों के प्रतिनिधियों ने बैठक को सूचित किया गया कि जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
अधिकारियों के अनुसार, ‘फिश मील’ की कीमत 1.5 लाख रुपये प्रति टन से बढ़कर 2.4 लाख रुपये हो गई, मछली के तेल की कीमत 2.8 लाख रुपये से बढ़कर 4.4 लाख रुपये हो गई और सोया की कीमत 68,000 रुपये से बढ़कर 1.1 लाख रुपये हो गई।
किसान प्रतिनिधियों ने सरकार से ग्रीष्मकालीन फसल की कटाई पूरी होने तक कम से कम दो महीने के लिए मौजूदा चारे की कीमतों को जारी रखने का अनुरोध किया और आंध्र प्रदेश राज्य मत्स्य पालन विकास प्राधिकरण (एपीएसएडीए) से लाइसेंस प्राप्त मत्स्यपालन फार्मों के लिए 1.50 रुपये प्रति यूनिट की रियायती बिजली की भी मांग की।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मुर्गी पालन के चारे की मूल्य निर्धारण नीति की तरह ही कच्चे माल की लागत के आधार पर झींगा के चारे की कीमत हर महीने तय करने की व्यवस्था शुरू की जाएगी।
भाषा जितेंद्र संतोष
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