‘सहयोग पोर्टल’ के खिलाफ कॉमेडियन कुणाल कामरा की याचिका पर उच्च न्यायालय ने केंद्र से मांगा जवाब

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‘सहयोग पोर्टल’ के खिलाफ कॉमेडियन कुणाल कामरा की याचिका पर उच्च न्यायालय ने केंद्र से मांगा जवाब

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  • Publish Date - July 16, 2026 / 03:35 PM IST,
    Updated On - July 16, 2026 / 03:35 PM IST

मुंबई, 16 जुलाई (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को कॉमेडियन कुणाल कामरा की उस याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें सरकार के ‘सहयोग पोर्टल’ की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।

कामरा ने अपनी याचिका में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों में हुए उस बदलाव को भी चुनौती दी है, जिसके तहत सोशल मीडिया या ‘ऑनलाइन इंटरमीडियरीज’ को किसी भी आपत्तिजनक विषय-वस्तु को 36 घंटे के भीतर हटाना ज़रूरी है।

उन्होंने दावा किया था कि ‘सहयोग पोर्टल’ सरकार द्वारा ऑनलाइन सेंसरशिप के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक हथियार है और बदले हुए नियमों से सरकार को बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के सामग्री हटाने का आदेश देने की शक्ति मिलती है।

कामरा के वकील नवरोज सीरवाई ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अनखड़ की खंडपीठ के सामने इस याचिका का विशेष उल्लेख किया।

उन्होंने दावा किया कि यह एक महत्वपूर्ण मामला है, लेकिन सरकार ने बार-बार के निर्देशों के बावजूद अपना जवाब दाखिल नहीं किया है।

उन्होंने कहा कि यह याचिका इस साल फरवरी में दायर की गई थी और अदालत ने समय-समय पर सरकार को हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था, लेकिन आज तक ऐसा नहीं किया गया।

केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कहा कि हलफनामा 29 जुलाई तक दाखिल कर दिया जाएगा।

अदालत ने उनके इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 अगस्त की तारीख तय की।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ऑनलाइन अपलोड की गयी आपत्तिजनक विषय-वस्तु को ‘ब्लॉक’ करने की प्रक्रिया तेज करने के लिए, 2024 में ‘सहयोग पोर्टल’ की शुरुआत की थी।

कामरा ने अपनी याचिका में दलील दी कि ‘सहयोग पोर्टल’ बिना किसी पूर्व सूचना के ऑनलाइन सामग्री को ‘ब्लॉक’ करने और हटाने की अनुमति देता है, जिससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन होता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि ‘सहयोग पोर्टल’ ऑनलाइन विषय-वस्तु को ‘‘मनमाने तरीके से हटाने’’ का अधिकार देता है।

याचिका में उच्च न्यायालय से सरकार को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वह (अदालत) ‘सहयोग पोर्टल’ पर रोक लगा दे और केंद्र या राज्य सरकार के किसी भी अधिकारी को आईटी अधिनियम के तहत तय प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी भी जानकारी को ‘ब्लॉक’ करने या हटाने का निर्देश देने से रोके।

भाषा सुरेश अविनाश

अविनाश