(तस्वीरों के साथ)
मुंबई, आठ फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि जाति का अस्तित्व अब काफी हद तक स्वार्थी हितों और राजनीतिक उद्देश्यों के लिए है, क्योंकि इसका पारंपरिक व्यवसाय आधारित आधार लुप्त हो गया है।
आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल लोगों के साथ एक संवाद सत्र के दौरान भागवत ने जाति आधारित संघर्षों से निपटने के लिए संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।
संघ प्रमुख ने कहा कि नेता जाति के नाम पर वोट मांगते हैं, क्योंकि जातिगत पहचान समाज में गहराई से समाई हुई है। उन्होंने कहा, “नेता विचारधारा से नहीं, बल्कि चुनावी हितों से प्रेरित होते हैं।”
भागवत ने कहा, “जाति का अस्तित्व अब काफी हद तक स्वार्थी हितों और राजनीतिक उद्देश्यों के लिए है, क्योंकि जाति का पारंपरिक व्यवसाय आधारित आधार बहुत पहले ही लुप्त हो चुका है।”
भाषा पारुल प्रशांत
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