चवदार झील सत्याग्रह ने समानता और सामाजिक न्याय का संदेश दिया: नेता

Ads

चवदार झील सत्याग्रह ने समानता और सामाजिक न्याय का संदेश दिया: नेता

  •  
  • Publish Date - March 20, 2026 / 07:50 PM IST,
    Updated On - March 20, 2026 / 07:50 PM IST

मुंबई, 20 मार्च (भाषा) महाराष्ट्र के महाड में शुक्रवार को डॉ. बी. आर. आंबेडकर के ऐतिहासिक चवदार झील सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष समारोह की शुरुआत हुई जिसमें नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसके संदेश – समानता, सामाजिक न्याय और भाईचारे – पर बात की।

बीस मार्च, 1927 को रायगढ़ जिले के महाड में डॉ. आंबेडकर के नेतृत्व में एक समूह ने महाड के चवदार ‘ताले’ या झील का पानी पिया था, जिसके जरिये समाज के सभी वर्गों, विशेषकर ‘अछूत’ माने जाने वाले लोगों के लिए सार्वजनिक जल स्रोतों तक पहुंच का अधिकार सुनिश्चित करने का संदेश दिया गया।

कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने शुक्रवार को कार्यक्रम में कहा कि चवदार झील का पानी ‘समानता का अमृत’ है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि इसे पूरे राज्य के गांवों तक ले जाकर सामाजिक समानता का संदेश फैलाया जाए।

महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी ने कहा कि महाड आंदोलन भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था और इसके आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं।

उन्होंने महाड में डॉ. आंबेडकर के सत्याग्रह और गांधी के नमक सत्याग्रह के बीच समानता बताते हुए कहा कि दोनों ने अहिंसक प्रतिरोध की शक्ति को उजागर किया।

उन्होंने कहा कि सामाजिक एकता को कमजोर करने वाली विभाजनकारी विचारधाराओं को अस्वीकार किया जाना चाहिए।

बाद में, सपकाल और कांग्रेस के कार्यकर्ता झील पर गए, आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की और घड़ों में पानी लिया, जिसे महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में वितरित किया जाएगा।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और जाति अंत संघर्ष समिति (जेएएसएस) ने 20 मार्च 1927 के सत्याग्रह और 25 दिसंबर 1927 को महाड में आंबेडकर द्वारा मनुस्मृति के प्रतीकात्मक दहन को याद करने के लिए लडावली गांव से झील तक एक शोभायात्रा का आयोजन किया।

भाषा जोहेब नरेश

नरेश