सामुदायिक प्रयासों से महाराष्ट्र के जिला परिषद स्कूल का कायाकल्प, शत-प्रतिशत नामांकन

सामुदायिक प्रयासों से महाराष्ट्र के जिला परिषद स्कूल का कायाकल्प, शत-प्रतिशत नामांकन

सामुदायिक प्रयासों से महाराष्ट्र के जिला परिषद स्कूल का कायाकल्प, शत-प्रतिशत नामांकन
Modified Date: August 18, 2026 / 03:11 pm IST
Published Date: August 18, 2026 3:11 pm IST

जालना (महाराष्ट्र), 18 अगस्त (भाषा) ‘टचस्क्रीन’ वाले डिजिटल बोर्ड, आधुनिक कंप्यूटर प्रयोगशाला, चौबीसों घंटे बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था और साफ-सुथरी रंगीन कक्षाएं, ये सुविधाएं भले ही किसी महंगे निजी स्कूल की लगें, लेकिन महाराष्ट्र के जालना जिले के एक मराठी माध्यम के जिला परिषद प्राथमिक विद्यालय में ये हकीकत हैं।

अधिकारियों ने बताया कि जाफराबाद तहसील के खामखेड़ा गांव में इस विद्यालय में उल्लेखनीय बदलाव आया है और यहां शत-प्रतिशत नामांकन हो चुका है। गांव में स्कूल जाने की उम्र का हर बच्चा अब इसी विद्यालय में पढ़ता है। बच्चे विद्यालय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर बुनियादी सुविधाओं से आकर्षित हुए हैं।

विद्यालय समिति के अध्यक्ष योगेश पाटिल फडाट ने बताया कि यह बदलाव सरकारी सहायता से नहीं, बल्कि शिक्षकों के संकल्प और ग्रामीणों के आर्थिक सहयोग से संभव हुआ है।

शिक्षक संदीप डोबले ने कहा,‘‘यह उपलब्धि हमारे ग्रामीणों की एकजुटता से पूरी तरह संभव हुई है।’’

विद्यालय के कायाकल्प की सबसे प्रमुख सुविधा 1.75 लाख रुपये की लागत वाला अत्याधुनिक डिजिटल बोर्ड है, जिसे पूरी तरह ग्रामीणों के सहयोग से खरीदा गया है। स्वतंत्रता दिवस पर इसका उद्घाटन किया गया, जो गांव के लिए गौरव का क्षण रहा।

कार्यक्रम में मौजूद जिला परिषद के उप कृषि अधिकारी नारायण पिंपले ने कहा कि यह बदलाव ग्रामीणों और शिक्षकों के सामूहिक प्रयासों से संभव हुआ है।

शिक्षकों के अनुसार, डिजिटल बोर्ड से पढ़ाई अधिक रोचक और दृश्यात्मक हो गई है, जबकि कंप्यूटर प्रयोगशाला से विद्यार्थियों को डिजिटल साक्षरता का व्यावहारिक ज्ञान मिल रहा है। प्राथमिक खंड में वर्तमान में 75 विद्यार्थी हैं, जिन्हें सरकारी मानकों के अनुरूप तीन शिक्षक पढ़ा रहे हैं।

भाषा राजकुमार

राजकुमार


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