मुंबई, 20 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र के पालघर जिले में प्रशासन की ओर से गुजराती भाषा में एक अधिसूचना जारी किए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने दावा किया है कि जल्द ही गुजराती राज्य पर थोप दी जाएगी, जबकि शिवसेना (उबाठा) ने इसे गंभीर मुद्दा बताया।
पालघर के कलेक्टर ने जिले में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के 19 और 20 जनवरी को आयोजित मोर्चे के मद्देनजर यह आदेश जारी किया था। इस दौरान कुछ जगहों पर सड़क पर वाहनों की आवाजाही को एहतियात के तौर पर प्रतिबंधित किया गया था।
खबरों के अनुसार, गुजरात से आने वाले मोटर वाहन चालकों की सुविधा के लिए इस आदेश का गुजराती में अनुवाद किया गया और सीमावर्ती क्षेत्रों, जैसे अचाद के पास के गांवों में प्रदर्शित किया गया।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मराठी का अपमान या उसके महत्व को कम करने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने कहा कि राजमार्ग पर वाहन चालकों की आवाजाही को प्रतिबंधित करने वाला मूल आदेश मराठी में ही जारी किया गया था।
नागपुर में पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस के नेता विजय वडेट्टीवार ने गुजराती अधिसूचना को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की।
उन्होंने कहा, “यह तो सिर्फ शुरुआत है। पालघर से गुजराती थोपना शुरू हुआ है। अगर भाजपा को मुंबई के महापौर का पद मिलता है, तो स्पष्ट हो जाएगा कि शहर किसके निर्देशों पर चलेगा।”
शिवसेना (उबाठा) के सांसद संजय राउत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मामले पर स्पष्टीकरण मांगा।
उन्होंने कहा, “सभी पार्टियों को इसपर गंभीरता से सोचना होगा। क्या पालघर महाराष्ट्र का हिस्सा है या बुलेट ट्रेन या वढवन बंदरगाह के बहाने इसे पड़ोसी राज्य में जोड़ दिया गया है?”
भंडारा में पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने आरोप लगाया कि मुंबई को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की साजिश रची जा रही है।
हालांकि, पालघर जिला कलेक्टरेट के वरिष्ठ अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।
जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “मराठी के अपमान या भ्रम की कोई गुंजाइश नहीं है। राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने वाला मूल आदेश मराठी में ही जारी किया गया था।”
उन्होंने बताया कि मुंबई-अहमदाबाद राजमार्ग पर बड़ी संख्या में गुजरात से मोटर वाहन चालक आते हैं, इसलिए उन्हें भी यातायात प्रतिबंधों की जानकारी देना जरूरी था।
अधिकारी ने कहा, “गुजरात से आने वाले मोटर वाहन चालकों की सुविधा के लिए यह आदेश गुजराती में अनुवाद करके सीमावर्ती गांवों में प्रदर्शित किया गया। इसी वजह से यह गलतफहमी पैदा हुई।”
भाषा जोहेब नोमान
नोमान