अदालत ने अग्निवीर की मां की याचिका पर जवाब में देरी पर केंद्र से नाखुशी जताई

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अदालत ने अग्निवीर की मां की याचिका पर जवाब में देरी पर केंद्र से नाखुशी जताई

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  • Publish Date - April 21, 2026 / 04:02 PM IST,
    Updated On - April 21, 2026 / 04:02 PM IST

मुंबई, 21 अप्रैल (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मारे गए एक अग्निवीर की मां की याचिका का जवाब न देने पर मंगलवार को केंद्र से नाखुशी जताई और भारी जुर्माना लगाने की चेतावनी दी। मां ने अग्निवीरों के लिए भी सैनिकों के समान मरणोपरांत लाभ देने की मांग की थी।

न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति हितेन वेनेगांवकर की पीठ ने केंद्र को अग्निवीर मुरली नाइक की मां की याचिका के जवाब में अपना हलफ़नामा दाखिल करने के लिए 6 मई तक का समय दिया। नाइक पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जम्मू कश्मीर में सीमा पार से हुई गोलाबारी में मारे गए थे।

अदालत ने कहा कि केंद्र को पिछले साल दिसंबर और फिर जनवरी में नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन आज तक जवाब दाखिल नहीं किया गया है।

न्यायमूर्ति घुगे ने चेतावनी दी, ‘‘यह याचिका पिछले साल से लंबित है। याचिका में उठाए गए मुद्दों पर याचिकाकर्ता ने पिछले साल जुलाई में सरकार को लिखे एक पत्र में भी बात की है। अगर अगली तारीख तक जवाबी हलफ़नामा दाखिल नहीं किया गया, तो हम भारी जुर्माना लगाएंगे।’’

अदालत ने कहा कि अब और कोई स्थगन नहीं लगाया जाएगा।

अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को अपना हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 18 जून को करना तय किया।

मुरली नाइक की मां ज्योतिबाई नाइक ने अपनी याचिका में कहा कि केंद्र की अग्निपथ योजना अग्निवीरों और नियमित सैनिकों के बीच ‘मनमाना’ फर्क पैदा करती है। उन्होंने परिवार को मरणोपरांत मिलने वाले पूरे लाभ नहीं दिये जाने में भेदभाव का आरोप लगाया।

भाषा वैभव नरेश

नरेश