बेरोजगार होने पर भी पिता बच्चों के भरण-पोषण का खर्च देने के लिए जिम्मेदार है : उच्च न्यायालय

बेरोजगार होने पर भी पिता बच्चों के भरण-पोषण का खर्च देने के लिए जिम्मेदार है : उच्च न्यायालय

बेरोजगार होने पर भी पिता बच्चों के भरण-पोषण का खर्च देने के लिए जिम्मेदार है : उच्च न्यायालय
Modified Date: June 11, 2026 / 04:40 pm IST
Published Date: June 11, 2026 4:40 pm IST

नागपुर, 11 जून (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने कहा है कि कोई पिता बेरोजगारी का हवाला देकर अपने नाबालिग बच्चों के भरण-पोषण का खर्च देने से बच नहीं सकता।

अदालत ने भरण-पोषण राशि कम करने की एक व्यक्ति की याचिका खारिज करते हुए यह बात कही।

उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति एम.एम. नारलीकर ने मंगलवार को व्यक्ति द्वारा निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती देने की अर्जी पर ये फैसला दिया, जिसमें उसे अपने दो नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता के तौर पर हर महीने 4,000 रुपये देने का निर्देश दिया गया था।

याचिकाकर्ता ने कहा कि वह अपनी आजीविका के लिए ऑटो-रिक्शा चलाता था, लेकिन तलाक के समय अपनी पत्नी को एकमुश्त रकम देने के लिए उसे वह गाड़ी बेचनी पड़ी।

उसने उच्च न्यायालय को बताया कि वह अपने बच्चों के भरण-पोषण के लिए हर महीने 3,000 रुपये देने को तैयार है।

हालांकि, उच्च न्यायालय ने कहा कि कोई व्यक्ति बेरोजगारी का हवाला देकर अपने बच्चों का गुजारा-भत्ता देने से बच नहीं सकता।

भाषा

शफीक नरेश

नरेश


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