‘सावजी’ मटन पर बयान देकर घिरे एफडीए आयुक्त मुंढे, रेस्तरां मालिकों ने जताई आपत्ति

‘सावजी’ मटन पर बयान देकर घिरे एफडीए आयुक्त मुंढे, रेस्तरां मालिकों ने जताई आपत्ति

‘सावजी’ मटन पर बयान देकर घिरे एफडीए आयुक्त मुंढे, रेस्तरां मालिकों ने जताई आपत्ति
Modified Date: August 4, 2026 / 08:14 pm IST
Published Date: August 4, 2026 8:14 pm IST

नागपुर, चार अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा नागपुर के प्रसिद्ध ‘सावजी मटन’ को लेकर की गई एक टिप्पणी पर इस लोकप्रिय व्यंजन को बनाने वाले रेस्तरां मालिकों और सावजी समुदाय ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

सावजी समुदाय के सदस्यों का कहना है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी के इस बयान से एक पाककला की ऐसी परंपरा की साख को ठेस पहुंची है, जो नागपुर की पहचान से गहराई से जुड़ी हुई है।

सावजी मटन स्थानीय समुदाय द्वारा तैयार की जाने वाली एक बेहद तीखी और मसालेदार मटन करी है। इसे भुने हुए खड़े मसालों, सूखे नारियल और भारी मात्रा में तेल के समृद्ध मिश्रण से तैयार किया जाता है, जिससे इसका गाढ़ा और मसालेदार रसा (ग्रेवी) बनता है।

हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मुंढे ने कहा था कि अगर उनके जैसा कोई व्यक्ति सावजी भोजन का सेवन कर ले, तो उसे ‘कम से कम एक महीने के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा।’

उन्होंने साथ ही कहा था कि इस तरह के अत्यधिक तेल युक्त भोजन के सेवन से हृदय रोग जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

उनके इस बयान पर सावजी रेस्तरां संचालकों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सावजी व्यंजन सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि नागपुर की सांस्कृतिक विरासत है।

एक रेस्तरां मालिक ने कहा, ‘अगर सावजी खाना वास्तव में इतना हानिकारक होता तो नागपुर के अस्पताल मरीजों से भरे पड़े होते।’

उन्होंने आशंका जताई कि मुंढे के इस बयान का उनके कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

एक अन्य रेस्तरां मालिक ने मुंढे को इस तरह के बयान देने से पहले असली और प्रामाणिक सावजी व्यंजन का स्वाद चखने का निमंत्रण दिया जबकि एक अन्य ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से पारंपरिक सावजी व्यंजन बनाकर खिलाने की पेशकश की।

भाषा सुमित नरेश

नरेश


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