पुणे जिले में यौन उत्पीड़न के बाद चार वर्षीय बच्ची की हत्या, 65 वर्षीय मजदूर गिरफ्तार

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पुणे जिले में यौन उत्पीड़न के बाद चार वर्षीय बच्ची की हत्या, 65 वर्षीय मजदूर गिरफ्तार

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  • Publish Date - May 2, 2026 / 03:13 PM IST,
    Updated On - May 2, 2026 / 03:13 PM IST

पुणे, दो मई (भाषा) महाराष्ट्र के पुणे जिले में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 65 वर्षीय मजदूर ने चार वर्षीय बच्ची का कथित तौर पर यौन उत्पीड़न कर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी।

घटना को लेकर आक्रोश और प्रदर्शन के बीच पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रदर्शनकारी ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मामले में 15 दिन के भीतर आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा और इसकी सुनवाई त्वरित अदालत में होगी।

यह घटना भोर तहसील के एक गांव में हुई।

अधिकारी ने कहा, ‘‘आरोपी ने बच्ची को कथित तौर पर खाना दिलाने का लालच देकर फुसलाया और वह उसे मवेशियों के बाड़े में ले गया जहां उसने उसका यौन उत्पीड़न किया और फिर उसकी हत्या कर दी।’’

उन्होंने कहा कि बच्ची के लापता होने पर उसके रिश्तेदारों ने उसकी तलाश शुरू की और इसी दौरान एक निजी आवास के सीसीटीवी फुटेज में आरोपी, बच्ची के साथ नजर आया जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इस घटना से इलाके में आक्रोश फैल गया और सैकड़ों ग्रामीणों ने पुलिस चौकी पर एकत्र होकर आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। बाद में लोगों की भीड़ ने मुंबई-बेंगलुरु राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया जिससे यातायात बाधित हो गया।

पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने लोगों को आश्वासन दिया कि मामले में 15 दिन के भीतर आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा और सुनवाई त्वरित अदालत में होगी।

गिल ने शनिवार को संवाददाताओं से कहा, ‘‘आरोपी का आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ 1998 और 2015 में मामले दर्ज किए गए थे। बाद में वह दोनों मामलों में बरी हो गया था। वह मजदूर है और आम तौर पर गांव के आसपास घूमता रहता था।’’

महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता अनिल देशमुख ने इस घटना को ‘‘बेहद निंदनीय’’ बताते हुए आरोपी के लिए मौत की सजा की मांग की।

उन्होंने राज्य और केंद्र सरकारों पर यौन अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए प्रस्तावित शक्ति अधिनियम को लागू करने के मामले में एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने का भी आरोप लगाया।

देशमुख ने कहा, ‘‘ऐसे अपराधी समाज में कैसे खुलेआम घूमते हैं? महा विकास आघाडी सरकार के कार्यकाल में जब मैं गृह मंत्री था, तब हमने शक्ति अधिनियम को मंजूरी दी थी जिसे केंद्र सरकार से अंतिम मंजूरी मिलनी बाकी है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जब राज्य में इस कानून की तत्काल आवश्यकता है तो केंद्र और राज्य सरकार इसे लागू करने के बजाय एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर समय बर्बाद कर रही हैं।’’

देशमुख ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में महिलाओं और लड़कियों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार शक्ति अधिनियम को लागू करने के बारे में गंभीर नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर यह कड़ा कानून लागू होता, तो इस राक्षस (आरोपी) को 15 दिन के भीतर मौत की सजा मिल जाती।’’

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि शक्ति विधेयक राज्य विधानमंडल ने 2020 में पारित किया था और राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए केंद्र को भेजा था। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति ने बाद में इसे वापस भेज दिया था। फडणवीस के पास गृह विभाग का भी प्रभार है।

महाराष्ट्र विधान परिषद ने मार्च में सर्वसम्मति से भारतीय न्याय संहिता (महाराष्ट्र संशोधन) विधेयक 2026 पारित किया, जिसमें तेजाब हमले के पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा से संबंधित शक्ति विधेयक के प्रावधान शामिल किए गए हैं और ऑनलाइन यौन उत्पीड़न के मामलों में कारावास की सजा सुनिश्चित की गई है।

भाषा

सिम्मी नेत्रपाल

नेत्रपाल