Surrendered Maoist Bhoopati Revelation || Image- ANI News File
गढ़चिरोली: प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के पूर्व नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू भूपति ने जंगलों में सक्रिय माओवादी कार्यकर्ताओं से हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने की अपील की है। (Surrendered Maoist Bhoopati Revelation) एएनआई को दिए विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि बदलती परिस्थितियों में सशस्त्र संघर्ष अब व्यावहारिक नहीं रह गया है और कैडरों को वास्तविकता को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने माना कि आंदोलन ने अपनी क्षमताओं और भारतीय राज्य दोनों का गलत आकलन किया।
69 वर्षीय सोनू भूपति ने 15 अक्टूबर 2025 को प्रतिबंधित पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) के 60 सदस्यों के साथ आत्मसमर्पण किया था। उन पर 60 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण स्थल तक पहुंचने के लिए उन्होंने अपने शिविर से करीब 25 किलोमीटर पैदल यात्रा की। हालांकि, उनके द्वितीय कमांडर प्रभाकरन अंतिम चरण में चार महिला गुरिल्लाओं के साथ जंगल में लापता हो गए।
सोनू भूपति ने बताया कि उन्होंने 28 वर्षों तक केंद्रीय समिति सदस्य और 18 वर्षों तक पोलित ब्यूरो सदस्य के रूप में कार्य किया। उन्होंने कहा, “अपने शत्रु को जानो और स्वयं को जानो-हम दोनों में असफल रहे।” उनके अनुसार, रणनीतिक गलतियों और जनसमर्थन जुटाने में विफलता ने आंदोलन को कमजोर कर दिया और यह दंडकारण्य के सीमित क्षेत्रों तक सिमट गया।
उन्होंने स्वीकार किया कि संगठन ने सशस्त्र शक्ति को अधिक आंका और भारतीय राज्य को कमतर समझा। उनका कहना था कि आंदोलन ने हथियारों पर ज्यादा ध्यान दिया, जबकि लोगों के वास्तविक मुद्दों पर आधारित संघर्ष को प्राथमिकता नहीं दी। उन्होंने माना कि स्थायी क्रांतिकारी आधार क्षेत्र बनाने की सोच अवास्तविक साबित हुई।
सोनू भूपति ने यह भी कहा कि कुछ कल्याणकारी योजनाओं, जैसे पीईएसए कानून और वन अधिकार अधिनियम, का विरोध करने से आदिवासी समुदायों के बीच संगठन की विश्वसनीयता घटी। (Surrendered Maoist Bhoopati Revelation) उन्होंने महाराष्ट्र में ग्राम सभा आधारित शासन को आदिवासियों के लिए लाभकारी बताया और माना कि विकास के इन बदलावों से सशस्त्र विद्रोह के प्रति समर्थन कम हुआ।
उन्होंने खुलासा किया कि 2021 की मुठभेड़ों के बाद संगठन में किसी महासचिव की आधिकारिक नियुक्ति नहीं हुई। साथ ही नोटबंदी से माओवादी नेटवर्क को बड़ा वित्तीय नुकसान हुआ। उनके अनुसार, बड़ी मात्रा में धन का लेन-देन रुक गया और कुछ रकम कभी वापस नहीं मिली। उन्होंने यह भी बताया कि हथियार मुख्य रूप से पुलिस ठिकानों पर हमलों के जरिए हासिल किए जाते थे।
आत्मसमर्पण के फैसले पर सोनू भूपति ने कहा कि यह अचानक लिया गया निर्णय नहीं था, बल्कि वर्षों के आत्ममंथन का परिणाम था। उन्होंने बताया कि सैकड़ों कार्यकर्ता उनके साथ मुख्यधारा में लौटे और कई अन्य ने भी बाद में हालात को समझते हुए आंदोलन छोड़ दिया। उन्होंने गढ़चिरोली को आत्मसमर्पण के लिए इसलिए चुना क्योंकि वहां विकास के बदलावों ने उनके सोच पर प्रभाव डाला।
दशकों तक भूमिगत जीवन बिताने के बाद अब मुख्यधारा में लौटे सोनू भूपति ने दोहराया कि आज के समय में सशस्त्र संघर्ष जारी रखना संभव नहीं है। (Surrendered Maoist Bhoopati Revelation) उन्होंने कहा कि आंदोलनों को बदलती वास्तविकताओं के अनुरूप ढलना होगा और रूढ़ियों में नहीं फंसना चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र में रहकर संवैधानिक दायरे में काम करने और लोकतांत्रिक तरीकों से जनता के मुद्दे उठाने की इच्छा जताई।
“We failed…cannot remain trapped in dogma”: Surrendered Maoist leader urges cadres to lay down arms
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— ANI Digital (@ani_digital) February 23, 2026