गुरु तेग बहादुर मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के जीवंत प्रकाश-स्तंभ : महाराष्ट्र के राज्यपाल

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गुरु तेग बहादुर मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के जीवंत प्रकाश-स्तंभ : महाराष्ट्र के राज्यपाल

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  • Publish Date - August 8, 2026 / 09:38 PM IST,
    Updated On - August 8, 2026 / 09:38 PM IST

ठाणे (महाराष्ट्र), आठ अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने शनिवार को गुरु तेग बहादुर को ‘‘मानवाधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और सद्भाव का जीवंत प्रकाश-स्तंभ’’ बताते हुए मांग की कि राज्य के 65 सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में से कम से कम एक में ‘श्री गुरु तेग बहादुर’ के नाम पर समर्पित पीठ स्थापित की जाए।

राज्यपाल ने नवी मुंबई के सीबीडी बेलापुर स्थित पंजाब हेरिटेज भवन में ‘श्री गुरु तेग बहादुर जी की विरासत’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया।

यह कार्यक्रम गुरु के बलिदान की 350वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया और इसे केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय, साहित्य अकादमी (नयी दिल्ली) और पंजाबी कल्चरल एंड वेलफेयर एसोसिएशन (नवी मुंबई) ने संयुक्त रूप से आयोजित किया।

महाराष्ट्र और पंजाब को जोड़ने वाले सदियों पुराने आध्यात्मिक रिश्तों का जिक्र करते हुए, राज्यपाल वर्मा ने कहा कि महाराष्ट्र ज्ञानेश्वर, तुकाराम और एकनाथ जैसे संतों की पवित्र भूमि है। उन्होंने भक्ति का संदेश फैलाने के लिए संत नामदेव की पंजाब यात्रा का भी उल्लेख किया, जिनकी पवित्र रचनाएं गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल हैं।

कार्यक्रम के दौरान एक खास ऑडियो संदेश में, केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि गुरु तेग बहादुर का सर्वोच्च बलिदान सच्चे ज्ञान और मानवीय स्वतंत्रता का एक अमर प्रतीक है, जो किसी भी दबाव के आगे झुकने से इनकार करता है।

भाषा शफीक नेत्रपाल

नेत्रपाल