ज्ञानेश कुमार को जेल भेजा जाए; महाराष्ट्र, बंगाल, तमिलनाडु में मतपत्रों से दोबारा चुनाव हो: उद्धव
ज्ञानेश कुमार को जेल भेजा जाए; महाराष्ट्र, बंगाल, तमिलनाडु में मतपत्रों से दोबारा चुनाव हो: उद्धव
मुंबई, 23 सितंबर (भाषा) शिवसेना (उबाठा) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने निर्वाचन आयोग में मतभेद की खबर सामने आने का हवाला देते हुए बुधवार को मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से बर्खास्त किया जाए और लोकतंत्र की ‘हत्या’ करने के लिए उन्हें जेल भेजा जाए।
ठाकरे ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह भी मांग की कि महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हाल में हुए चुनावों को रद्द किया जाए और इन राज्यों में मतपत्रों का उपयोग करके दोबारा मतदान कराया जाए।
वह ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खबर पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए आदेशों और निर्णयों पर बार-बार आपत्ति जताई थी। इनमें फॉर्म-छह में बदलाव और मतदाता सूची आंकड़ा आधार (डेटाबेस) पर नियंत्रण का केंद्रीकरण शामिल था।
ठाकरे ने दावा किया कि एसआईआर के दौरान पश्चिम बंगाल में 90 लाख मतदाताओं और तमिलनाडु में 70 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए।
उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में 45 लाख मतदाता जोड़े गए थे और अब मतदाता सूची में शामिल 40 लाख नागरिकों के नामों पर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ठाकरे ने कहा, ‘ज्ञानेश कुमार को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए और जेल भेजा जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने लोकतंत्र की हत्या की है और संविधान का अपमान किया है।’
ठाकरे ने कहा, ‘मैं ज्ञानेश कुमार की पोल खोलने और साहस दिखाने के लिए निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को धन्यवाद देता हूं।’
उन्होंने दावा किया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने ‘कुमार के खिलाफ विद्रोह कर दिया है’ और यह ‘माना जा सकता है कि उन्होंने सीईसी को हटा दिया है क्योंकि अब उनके पास बहुमत है।’
ठाकरे ने कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों को चुनाव निकाय द्वारा लिए गए सभी गलत फैसलों को रद्द कर देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर कोई कार्रवाई नहीं की गई तो लोग कानून अपने हाथ में ले लेंगे और अगर लोगों का चुनावी प्रक्रिया से विश्वास उठ गया तो देश में अराजकता फैल जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत को इस पूरे मामले का संज्ञान लेना चाहिए।
उद्धव ने कहा कि दोनों निर्वाचन आयुक्तों को आयोग द्वारा लिये गए सभी ‘गलत फैसलों’ को रद्द कर देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘देश में लोकतंत्र को बचाने के लिए सभी विपक्षी दलों को एकजुट होना चाहिए।’
ठाकरे ने कहा कि पिछले कुछ सालों से देश में एक ‘गिरोह उत्पात मचा रहा था लेकिन अब गिरोह की पोल खुल चुकी है। यह गिरोह पार्टियों को तोड़ने, पार्टियां चुराने, लोकतंत्र की हत्या करने में शामिल रहा है और इसका सरगना ज्ञानेश कुमार है।’
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग गृह मंत्रालय के इशारे पर काम करता है। ठाकरे ने कहा कि अगर इसके पीछे गृह मंत्री हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग “लोकतंत्र को चुराने और खत्म करने” के तरीके का पालन कर रहा है। ठाकरे ने कहा, “वे पहले चुनाव चिह्न पर रोक लगाते हैं और फिर आंशिक फैसला देते हैं। उन्होंने ऐसा शिवसेना (उबाठा), राकांपा और अब तृणमूल कांग्रेस के मामले में किया है। शिवसेना (उबाठा) इसका उदाहरण है कि किस तरह फैसले मनमाने तरीके से दिए गए हैं।”
भाषा सुमित अमित
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