उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार के ‘सब ठीक है’ वाले रुख की आलोचना की

उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार के ‘सब ठीक है’ वाले रुख की आलोचना की

उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार के ‘सब ठीक है’ वाले रुख की आलोचना की
Modified Date: September 23, 2026 / 05:28 pm IST
Published Date: September 23, 2026 5:28 pm IST

मुंबई, 23 सितंबर (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने त्योहारों के दौरान सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध लगाते हुए महाराष्ट्र सरकार की इस बात के लिए आलोचना की है कि वह स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने और ‘सब ठीक है’ का मंत्र जपने में लगी हुई है जबकि ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।

उच्च न्यायालय ने तेज आवाज वाले संगीत पर “पूर्ण रूप से अंकुश” लगाने की आवश्यकता पर बल देते हुए त्योहारों को अधिक गरिमापूर्ण और सभ्य तरीके से मनाने की अपील की है।

न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने मंगलवार को कहा था कि ध्वनि प्रदूषण (नियमन और नियंत्रण) नियमों को लागू करने में प्रवर्तन तंत्र की ओर से “पूरी तरह से लापरवाही” बरती गई है।

इसके अलावा पीठ ने त्योहारों के समय निकाले जाने वाली शोभायात्राओं के दौरान सार्वजनिक मार्गों पर ‘लाउडस्पीकर’, ‘डीजे’, ‘लेजर बीम’ के इस्तेमाल और पटाखे फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया।

अदालत ने धार्मिक यात्राओं के दौरान होने वाले गंभीर ध्वनि और वायु प्रदूषण के मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया था।

उसने कहा था कि इस तरह के कृत्य पूरी तरह से अनुचित है तथा त्योहारों को ध्वनि और वायु प्रदूषण फैलाए बिना मनाया जा सकता है। साथ ही यह भी कहा गया है कि इन शोभायात्राओं और समारोहों को अधिक गरिमापूर्ण और सभ्य तरीके से आयोजित करना आज के दौर की आवश्यकता है।

अदालत ने कहा, “क्या इन सभी लाउडस्पीकरों और पटाखों का इस्तेमाल करके हमें भगवान से और ज्यादा आशीर्वाद मिलेगा? एक जिम्मेदार समाज के तौर पर, हमें इन सब चीजों को बंद कर देना चाहिए। उदाहरण के लिए, वारी यात्रा (पंढरपुर की सालाना पैदल तीर्थयात्रा) को ही लें। यह यात्रा बहुत शांति से निकाली जाती है, जिसमें न तो कोई लाउडस्पीकर होता है और न ही कोई शोर-शराबा।”

इस संबंध में बुधवार को उपलब्ध कराए गए अदालत के आदेश में कहा कि वह राज्य सरकार द्वारा “सब कुछ ठीक है” का मंत्र जपने और स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर बेहतर दिखाने के प्रयास को स्वीकार नहीं कर सकती।

अदालत ने कहा कि ऐसी यात्राओं के लिए पुलिस की ओर से दी जाने वाली अनुमति और रात में पटाखे, लाउडस्पीकर, लेजर बीम तथा डीजे के इस्तेमाल पर रोक लगाने वाले सामान्य आदेश महज औपचारिकता बनकर रह गए हैं। आधिकारिक तंत्र की निष्क्रियता के कारण ये अप्रभावी हो जाते हैं, जिससे हर तरह के उल्लंघन की अनुमति मिल जाती है।

भाषा

प्रचेता प्रशांत

प्रशांत


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