उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार से अग्नि सुरक्षा पर समिति बनाने को लेकर किया सवाल

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उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार से अग्नि सुरक्षा पर समिति बनाने को लेकर किया सवाल

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  • Publish Date - July 28, 2022 / 03:56 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 07:51 PM IST

मुंबई, 28 जुलाई (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को सवाल किया कि महाराष्ट्र में मौजूदा और पूर्ववर्ती सरकारों को अग्नि सुरक्षा मानकों को लागू करने के लिए समिति गठित करने का समय क्यों नहीं मिला जबकि कथित रूप से उसने 400 सरकारी प्रस्ताव पारित किए हैं।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एम.एस.कार्णिक की पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह हलफनामा दाखिल कर विस्तार से बताए कि उसने इस साल 11 अप्रैल को जारी आदेश के बाद ऐसी समिति गठित करने और आग लगने का खतरा झेल रही इमारतों में अग्नि सुरक्षा मानकों को लागू करवाने के लिए क्या कदम उठाए हैं।

अदालत का यह निर्देश राज्य की ओर से पेश अधिवक्ता हितेन वेनगांवकर द्वारा यह बताए जाने के बाद दिया गया कि सरकार वर्ष 2009 में बने सुरक्षा नियम मसौदा को नए विकास नियंत्रण एवं योजना विनियमन (डीसीपीआर) में शामिल करने की प्रक्रिया में है।

वेनगांवकर ने अदालत को बताया कि मसौदा नियमों को डीसीपीआर में शामिल करने के लिए विशेष समिति गठित करने की जरूरत है और ऐसी विशेष समिति गठित करने के लिए तीन से चार महीने का समय लगेगा।

अदालत ने कहा कि यह ‘‘बहुत लंबा समय है साढ़े तीन महीने, समिति गठित करने के लिए? हमने अखबार में पढ़ा है कि हाल में 400 सरकारी प्रस्ताव जारी किए गए हैं, लेकिन एक साधारण समिति गठित नहीं की जा सकी, वह भी तब जबकि अनगिनत लोगों की जिंदगी दांव पर है।’’

अदालत ने इसके बाद वेनगांवकर को निर्देश किया कि वह शुक्रवार को संबधित दस्तावेज पेश करे जिससे यह पता चलता हो कि ‘‘ अप्रैल को उसके (अदालत के) द्वारा जारी निर्देश के बाद क्या प्रगति हुई है।’’

अदालत अधिवक्ता अदित्य प्रताप की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उन्होंने मानव जनित आपदा को दावत देने वाली इमारतों में विशेष नियमन मसौदा को लागू करवाने का अनुरोध किया है।

यह नियमन 26 नवंबर 2008 को मुंबई पर हुए हमले के बाद वर्ष 2009 में जारी किए गए थे।

भाषा धीरज माधव

माधव

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