ठाणे, 24 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र में ठाणे की एक अदालत ने कथित देह व्यापार गिरोह से संबंधित करीब 10 साल पुराने एक मामले में दो आरोपियों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि पीड़ित महिलाओं और ग्राहक के वेश में भेजे गए व्यक्ति की गवाही नहीं कराई गई, जिससे अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आर. एस. भाकरे ने गोपालप्रसाद राजेंद्र प्रसाद गुप्ता (44) और राकेशकुमार शामलाल सरोज (48) के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) तथा अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम (आईटीपीए) के तहत लगाए गए सभी आरोपों से उन्हें बरी कर दिया।
अदालत के 21 जुलाई के आदेश की प्रति बृहस्पतिवार को उपलब्ध हुई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सितंबर 2016 में पुलिस ने ग्राहक के वेश में एक व्यक्ति को भेजने के बाद ठाणे के घोडबंदर रोड स्थित एक स्थान पर छापा मारा था और एक ऑटो रिक्शा में मौजूद दो महिलाओं के साथ आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
हालांकि, न्यायाधीश ने कहा कि मुकदमे के दौरान न तो पीड़ित महिलाओं की और न ही उस व्यक्ति की गवाही कराई गई, जिसे ग्राहक के वेश में भेजा गया था।
अदालत ने कहा, ‘‘…चूंकि पीड़ित महिलाओं की गवाही दर्ज नहीं कराई गई, इसलिए अभियोजन पक्ष के गवाहों द्वारा उनके कथित बयानों का उल्लेख केवल सुनी-सुनाई बात माना जाएगा। कानून की नजर में ऐसा साक्ष्य अत्यंत कमजोर होता है।’’
अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष ग्राहक के वेश में भेजे गए व्यक्ति का बयान दर्ज कराने में भी विफल रहा। आदेश में कहा गया, ‘‘आरोपियों और पीड़ित महिलाओं के बीच क्या बातचीत हुई थी, इसकी जानकारी केवल वही दे सकता था।’’
स्वतंत्र गवाहों का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा कि वे ‘‘इससे पहले भी कई मामलों’’ में गवाह रह चुके थे।
अदालत ने कहा कि स्वतंत्र और पुष्टिकारक साक्ष्यों के अभाव में अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध नहीं कर सका। इस आधार पर दोनों आरोपियों को बरी कर दिया गया।
भाषा
खारी सुरेश
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