अपने फिल्मी सफर को लेकर खुद को ‘धन्य’ और ‘गौरवान्वित’ महसूस करती हूं: हेमा मालिनी

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अपने फिल्मी सफर को लेकर खुद को ‘धन्य’ और ‘गौरवान्वित’ महसूस करती हूं: हेमा मालिनी

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  • Publish Date - July 11, 2026 / 05:13 PM IST,
    Updated On - July 11, 2026 / 05:13 PM IST

मुंबई, 11 जुलाई (भाषा) भारतीय सिनेमा में अपने 60 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहीं दिग्गज अभिनेत्री हेमा मालिनी ने कहा है कि वह अपने फिल्मी सफर को लेकर खुद को ‘‘धन्य’’ और ‘‘गौरवान्वित’’ महसूस करती हैं।

उन्होंने इस यात्रा का श्रेय फिल्म निर्माताओं, सह-कलाकारों, तकनीशियनों और अपने परिवार के अटूट सहयोग को दिया।

अभिनेत्री ने इस उपलब्धि का जश्न ‘हेमा मालिनी – लाइव इन कॉन्सर्ट: सेलिब्रेटिंग द ड्रीम गर्ल्स डायमंड जुबली – 60 ग्लोरियस इयर्स इन सिनेमा’ कार्यक्रम के जरिए मनाया।

मुंबई के षण्मुखानंद हॉल में शुक्रवार शाम आयोजित इस कार्यक्रम में 15 सदस्यीय लाइव ऑर्केस्ट्रा ने उनके फिल्मी करियर के यादगार पड़ावों को गीतों के माध्यम से प्रस्तुत किया।

‘शोले’, ‘सीता और गीता’, ‘सत्ते पे सत्ता’, ‘खुशबू’, ‘नसीब’ और ‘बागबान’ जैसी फिल्मों की अदाकारा हेमा मालिनी ने कहा कि वर्षों से उन्हें मिले दर्शकों के प्यार और समर्थन के लिए वह आभारी हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपनी मां की आभारी हूं, जिन्होंने हमेशा मेरा साथ दिया। मेरा मानना है कि बच्चों के जीवन और करियर में मां की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मेरा परिवार हमेशा मेरे साथ खड़ा रहा और उसी वजह से मैं आगे बढ़ सकी।’’

अभिनेत्री ने कहा, ‘‘मैं इस शानदार फिल्म उद्योग का हिस्सा बनकर बेहद खुश और गर्व महसूस करती हूं। इस उद्योग ने अतीत और वर्तमान में कई सितारों को जन्म दिया है। मैंने यहां कई दशक बिताए हैं, करीब 200 फिल्मों में काम किया है, अनेक यादगार गीतों का हिस्सा रही हूं और कई निर्देशकों तथा अभिनेताओं के साथ काम करने का अवसर मिला है।’’

छह दशक लंबे करियर में 200 से अधिक फिल्मों में अभिनय कर चुकीं हेमा मालिनी ने दो फिल्मों का निर्देशन भी किया है। इनमें शाहरुख खान अभिनीत ‘दिल आशना है’ (1992) और उनकी बेटी ईशा देओल अभिनीत ‘टेल मी ओ खुदा’ (2011) शामिल हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘फिल्म उद्योग बहुत विशाल और खूबसूरत है। यह हर किसी को अवसर देता है। बस आपके भीतर प्रतिभा और समर्पण होना चाहिए, तब आप सफलता की ऊंचाई तक पहुंच सकते हैं।’’

हेमा मालिनी ने परदे के पीछे काम करने वाले तकनीशियनों, जैसे कॉस्ट्यूम डिजाइनर, मेकअप आर्टिस्ट और सिनेमैटोग्राफर के योगदान को भी सराहा।

जब उनसे पूछा गया कि क्या दीपिका पादुकोण उनकी जीवनी पर आधारित फिल्म में उनका किरदार निभा सकती हैं, तो हेमा मालिनी ने तुरंत सहमति जताई।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर वह चाहें तो कर सकती हैं। कोई भी यह फिल्म कर सकता है। दीपिका बेहद खूबसूरत और प्रतिभाशाली अभिनेत्री हैं।’’

इस अवसर पर सुदेश भोंसले, सुरेश वाडकर, पद्मिनी कोल्हापुरी, शब्बीर कुमार, अनु मलिक, अनूप जलोटा, कविता कृष्णमूर्ति, विजेता पंडित और पूर्णिमा श्रेष्ठा ने हेमा मालिनी के लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति दी, जिनमें ‘मेरी मखना मेरी सोनिये’, ‘होरी खेले रघुवीरा’ और ‘एक न एक दिन ये कहानी बनेगी’ शामिल हैं।

हेमा मालिनी ने कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाले सभी गायकों का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं खुद को सौभाग्यशाली मानती हूं। मैं सभी की आभारी हूं।’’

उन्होंने यह भी कहा कि 1970 और 1980 के दशक के गीतों और फिल्मों का आकर्षण आज भी पूरी दुनिया में बरकरार है।

इस संगीत समारोह में फिल्म जगत से जुड़े उनके कई मित्र और सहकर्मी, जिनमें मधु, पूनम ढिल्लों, राकेश रोशन, शत्रुघ्न सिन्हा, जितेंद्र, रमेश सिप्पी, किरण जुनेजा, बाबुल सुप्रियो, संजीव गुप्ता सहित अन्य लोग शामिल हुए।

हेमा मालिनी ने अपने सह-कलाकारों का कार्यक्रम में शामिल होने के लिए धन्यवाद दिया।

उन्होंने यह भी बताया कि उनकी बड़ी बेटी ईशा देओल वायरल संक्रमण से पीड़ित होने के कारण इस समारोह में शामिल नहीं हो सकीं।

निर्देशक रमेश सिप्पी ने हेमा के साथ अपने लंबे पेशेवर रिश्ते को याद करते हुए उनकी कार्यशैली की सराहना की।

सिप्पी ने कहा, ‘‘काम के दौरान हमारी आपसी समझ हमेशा बेहतरीन रही। वह हर बात बहुत अच्छी तरह समझती हैं और उनकी याददाश्त कमाल की है। जिस तरह उन्हें अपने संवाद याद रहते हैं, वह अद्भुत है। मुझे याद है कि ‘सीता और गीता’ में दोहरी भूमिका निभाने का प्रस्ताव मिलते ही वह तुरंत तैयार हो गई थीं। हमने साथ में कई फिल्मों में काम किया, लेकिन ‘शोले’ के 50 साल बाद भी लोग उन्हें ‘बसंती’ के रूप में ही सबसे ज्यादा याद करते हैं।’’

अभिनेत्री मधु ने कहा कि वह मुश्किल परिस्थितियों में भी हेमा के शांत और संतुलित बने रहने के स्वभाव की प्रशंसक हैं।

अभिनेत्री पूनम ढिल्लों ने हेमा को फिल्म उद्योग का ‘‘गौरव’’ बताया।

उन्होंने अभिनय के प्रति हेमा मालिनी के समर्पण की सराहना की और एक राजनेता के रूप में उनके योगदान की भी प्रशंसा की।

पार्श्व गायिका कविता कृष्णमूर्ति ने हेमा मालिनी के साथ अपने लंबे जुड़ाव को याद किया।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने हेमा जी को तब से देखा है, जब मैं तीन साल की थी। हम दिल्ली में साथ-साथ बड़े हुए हैं। वह मेरी बहन की करीबी दोस्त थीं। दोनों साथ में भरतनाट्यम की कक्षाओं में जाया करती थीं। बाद में वह बहुत मशहूर अभिनेत्री बन गईं और मैंने उनके करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचते देखा लेकिन मेरे और मेरे परिवार के साथ उनका रिश्ता आज भी वैसा ही है, उसमें कोई बदलाव नहीं आया है।’’

भाषा राखी शफीक

शफीक