यदि अपनेपन की भावना मजबूत हो जाए, तो दुनिया से संघर्ष खत्म हो जायेंगे: मोहन भागवत

यदि अपनेपन की भावना मजबूत हो जाए, तो दुनिया से संघर्ष खत्म हो जायेंगे: मोहन भागवत

यदि अपनेपन की भावना मजबूत हो जाए, तो दुनिया से संघर्ष खत्म हो जायेंगे: मोहन भागवत
Modified Date: August 11, 2026 / 05:48 pm IST
Published Date: August 11, 2026 5:48 pm IST

नागपुर, 11 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि सार्वभौमिक चेतना मानवता को जोड़कर रखती है और अगर लोग इस साझा जुड़ाव को समझ लें एवं उसी के अनुसार अपना व्यवहार ढाल लें, तो दुनिया में बाधाएं और संकट नहीं रहेंगे।

भगवत ने यहां प्रसिद्ध गणेश टेकरी मंदिर में पूजा-अर्चना की और मंदिर के गर्भगृह का उद्घाटन किया।

संघ प्रमुख ने मंदिर परिसर में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सार्वभौमिक चेतना सबमें व्याप्त है।

भागवत ने कहा, ‘‘भगवान गणेश ऊर्जा के स्रोत हैं और संगठन के सच्चे अर्थ का प्रतिनिधित्व करते हैं। हर कोई इस अपनेपन की भावना से अनजाने ही परिचित है और स्वयं को दूसरे से जुड़ा महसूस करता है। सच्ची एकता क्या है? हम सभी एक ही ऊर्जा की अभिव्यक्ति हैं।’’

उन्होंने कहा कि अगर इस सार्वभौमिक चेतना को समझ लिया जाए, तो व्यक्ति का अपने प्रति, दूसरों के प्रति और दुनिया के प्रति व्यवहार बदल जाता है।

आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘‘आम भाषा में, हम इस भावना को अपनापन या जुड़ाव की भावना कहते हैं। अगर इस भावना को सोच-समझकर मज़बूत किया जाए और व्यक्ति अपने व्यवहार को उसी के अनुसार ढाले, तो हमारी दुनिया में कोई बाधा नहीं रहेगी।’’

भागवत ने कहा, ‘‘आज दुनिया में जो भी बाधाएं और संकट दिख रहे हैं, वे इसलिए हैं, क्योंकि हम ‘अपनेपन’ की भावना भूल गए हैं और इसका एकमात्र वास्तविक समाधान यही है: हमारा व्यक्तिगत, सामूहिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आचरण उसी ‘अपनेपन’ की भावना पर आधारित होना चाहिए। तब बाधाएं दूर हो जायेंगी।’’

भाषा

राजकुमार दिलीप

दिलीप


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