मुंबई, 18 मार्च (भाषा) महाराष्ट्र आतंकवाद-रोधी दस्ते (एटीएस) के पूर्व प्रमुख के.पी. रघुवंशी के 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले की जांच के दौरान तत्कालीन संप्रग सरकार द्वारा उन पर डाले गए ‘‘दबाव’’ के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक पदाधिकारी ने कहा कि अगर ऐसा कुछ हुआ, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण था।
रघुवंशी ने अपनी जीवनी ‘ट्रबलशूटर’ में दावा किया है कि मालेगांव विस्फोट मामले में सबूतों की कमी के कारण आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार को गिरफ्तार करने से इनकार करने के बाद उन्हें एटीएस प्रमुख के पद से हटा दिया गया था।
पत्रकार जितेंद्र दीक्षित द्वारा लिखी पुस्तक में दावा किया गया कि रघुवंशी को दिल्ली बुलाया गया और उनसे कुमार को गिरफ्तार करने के लिए कहा गया। पुस्तक में कहा गया है कि सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए रघुवंशी ने इनकार कर दिया, जिसके बाद उन्हें उनके पद से हटा दिया गया।
मंगलवार को यहां प्रेसवार्ता में पुस्तक के बारे में पूछे जाने पर, आरएसएस के कोंकण क्षेत्र के पदाधिकारी विट्ठलराव कांबले ने कहा, ‘‘जब ये सभी घटनाएं सामने आईं, तब हममें से कोई भी वहां मौजूद नहीं था। अगर ये सब हुआ, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण था। अभी हम बस इतना ही कह सकते हैं।’’
भाषा शफीक पवनेश
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