बाढ़ में खराब हुए शराब के स्टॉक पर बीमा कंपनी को 1.20 करोड़ रुपये से अधिक चुकाने का आदेश

बाढ़ में खराब हुए शराब के स्टॉक पर बीमा कंपनी को 1.20 करोड़ रुपये से अधिक चुकाने का आदेश

बाढ़ में खराब हुए शराब के स्टॉक पर बीमा कंपनी को 1.20 करोड़ रुपये से अधिक चुकाने का आदेश
Modified Date: August 4, 2026 / 08:38 pm IST
Published Date: August 4, 2026 8:38 pm IST

मुंबई, चार अगस्त (भाषा) मुंबई के एक उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने शहर के एक शराब कारोबारी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ‘नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड’ को वर्ष 2017 में मुंबई में आई बाढ़ के दौरान खराब हुए उसके शराब के स्टॉक के एवज में 1.20 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ब्याज सहित अदा करने का निर्देश दिया है।

दक्षिण मुंबई जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने पिछले महीने पारित अपने आदेश में बीमा दावे को खारिज करने के कंपनी के फैसले को ‘मनमाना और अनुचित’ करार देते हुए कहा कि मीठी नदी के प्रदूषित बाढ़ के पानी से शराब का स्टॉक बिक्री योग्य नहीं रह गया था, इसलिए बीमा कंपनी आकलित नुकसान की भरपाई नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ करने के लिए उत्तरदायी है।

कुर्ला स्थित शराब के थोक कारोबार से जुड़ी एक कंपनी ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी कि 29 अगस्त, 2017 को मुंबई में हुई मूसलाधार बारिश के कारण उसका गोदाम जलमग्न हो गया था।

शिकायतकर्ता ने कहा कि कीचड़ युक्त बाढ़ के पानी से बड़ी मात्रा में शराब की बोतलों और कैन को नुकसान पहुंचा। बोतलों के ढक्कनों में जंग लग गया, लेबल खराब हो गए और स्टॉक दूषित हो गया, जिससे राज्य आबकारी विभाग की निगरानी और उद्योग मानकों के अनुसार वह बिक्री के लिए अनुपयुक्त हो गया।

कंपनी का दावा था कि बीमा कंपनी के सर्वेक्षक ने नुकसान का आकलन कर 1.20 करोड़ रुपये के दावे का निपटारा करने की सिफारिश की थी, लेकिन इसके बावजूद बीमा कंपनी ने 14 जनवरी, 2020 को औपचारिक रूप से दावा खारिज कर दिया।

बीमा कंपनी ने दलील दी कि कारोबारी फर्म यह साबित करने के लिए फॉरेंसिक प्रयोगशाला की रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर सकी कि शराब मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त हो गई थी। साथ ही उसने नष्ट किए गए भंडार (स्टॉक) का वीडियो साक्ष्य भी उपलब्ध नहीं कराया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग ने कहा कि राज्य आबकारी विभाग ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की थी कि शराब का स्टॉक मीठी नदी के प्रदूषित बाढ़ के पानी में डूब गया था और वह उपभोग के लिए अनुपयुक्त हो गया था।

आयोग ने कहा कि राज्य आबकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया था कि ऐसी दूषित शराब के संबंध में कोई भी प्रयोगशाला प्रमाणपत्र जारी नहीं करती और संबंधित स्टॉक को अधिकारियों की कड़ी निगरानी में नष्ट किया गया था।

आयोग ने माना कि बीमा कंपनी ने अपने ही स्वतंत्र सर्वेक्षक की रिपोर्ट की अनदेखी की।

आयोग ने कहा, ‘‘फॉरेंसिक रिपोर्ट की आवश्यकता न तो बीमा पॉलिसी की शर्तों में है और न ही राज्य आबकारी अधिकारियों ने इसकी अपेक्षा की है, जबकि शराब के स्टॉक से संबंधित मामलों में वही सक्षम वैधानिक प्राधिकरण हैं।’’

आयोग ने बीमा कंपनी को शिकायतकर्ता को 1,20,12,403 रुपये की आकलित क्षति राशि 14 जनवरी, 2020 से भुगतान की तिथि तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने का निर्देश दिया।

इसके अलावा आयोग ने मानसिक तनाव, असुविधा और कठिनाइयों के लिए एक लाख रुपये का मुआवजा तथा मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में 25,000 रुपये भी शिकायतकर्ता को देने का आदेश दिया।

भाषा रवि कांत रवि कांत नरेश

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