पुणे, पांच फरवरी (भाषा) मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर टैंकर के पलट जाने के बाद क्षतिग्रस्त वाल्व, ज्वलनशील प्रोपलीन गैस के लगातार रिसाव के बीच टैंकर से गैस निकालने का काम बेहद जोखिम भरा हो गया था। एक विशेषज्ञ ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
एक्सप्रेसवे पर मंगलवार शाम हुए टैंकर हादसे के कारण 30 घंटे से अधिक समय तक यातायात बाधित रहा।
‘एमईसी इलेक इंडस्ट्रियल सर्विसेज’ की एक विशेषज्ञ टीम द्वारा गैस निकाले जाने का काम बुधवार रात डेढ़ बजे समाप्त हुआ।
एमईसी ईएलईसी के कार्यकारी निदेशक ज्ञानेश दिवेकर ने कहा, ‘‘वाल्व क्षति, उच्च आंतरिक दबाव और आसपास के क्षेत्र में ज्वलनशील गैस की सांद्रता की उपस्थिति के कारण पलटे हुए प्रोपलीन गैस टैंकर को हटाना एक अत्यंत महत्वपूर्ण और खतरनाक अभियान था।’’
दिवेकर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘एक घंटे के भीतर कंपनी की तकनीकी टीम घटनास्थल पर पहुंची और पाया कि टैंकर के तीनों मुख्य वाल्व – दो तरल वाल्व और एक वाष्प वाल्व – दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिसके कारण द्रवीकृत प्रोपलीन गैस का लगातार रिसाव हो रहा था।’’
उन्होंने कहा कि प्रोपलीन की न्यूनतम विस्फोटक सीमा (एलईएल) केवल 2 प्रतिशत है, जिसका अर्थ है कि हवा के साथ मिश्रित थोड़ी सी मात्रा भी विस्फोट कर सकती है।
दिवेकर ने कहा, ‘‘एक समय ऐसा भी आया जब घटनास्थल से आधा किलोमीटर दूर भी एलईएल की 20 प्रतिशत तक गैस की सांद्रता पाई गई थी।’’ उन्होंने आगे कहा कि वाहनों के एग्जॉस्ट, मोबाइल फोन या बिजली के स्रोतों से निकलने वाली कोई भी चिंगारी एक बड़ी आपदा को जन्म दे सकती थी।
भाषा यासिर संतोष
संतोष