मुंबई, 24 मार्च (भाषा) पुणे के मुंधवा क्षेत्र में सरकारी जमीन को पार्थ पवार की सह-स्वामित्व वाली कंपनी को बेचे जाने की जांच करने वाली विकास खरगे समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह अवैध लेन-देन राजस्व, स्टाम्प और पंजीकरण विभाग के अधिकारियों द्वारा सुगम बनाया गया था।
हालांकि, समिति ने इस मामले में आपराधिक दायित्व पर यह कहते हुए टिप्पणी करने से परहेज किया कि यह उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
महाराष्ट्र राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव खरगे की अध्यक्षता में इस मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया था। यहां सैकड़ों करोड़ रुपये की सरकारी जमीन की अवैध बिक्री का मामला सामने आया, जिसे अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी को बेचा गया था, जिसमें दिवंगत राकांपा नेता अजित पवार के बेटे पार्थ की बड़ी हिस्सेदारी है।
इसकी रिपोर्ट बुधवार को महाराष्ट्र विधानसभा में पेश की गई।
समिति ने कहा कि आपराधिक दायित्व का निर्धारण करना उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है, हालांकि उसने यह भी माना कि इस मामले में आपराधिक प्रकृति के अपराध शामिल हैं। समिति ने अमाडिया एंटरप्राइजेज के साझेदार दिग्विजय पाटिल को विवादित भूमि की जानकारी होने के बावजूद उसे खरीदने के लिए जिम्मेदार ठहराया और इसे एक गंभीर चूक बताया।
रिपोर्ट के अनुसार, मुंधवा में लगभग 40 एकड़ सरकारी जमीन राज्य सरकार के स्वामित्व में होने के बावजूद अमाडिया एंटरप्राइजेज को बेच दी गई, जबकि सरकार ने इसे भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (बीएसआई) को पट्टे पर दिया था। समिति ने इस सौदे को सुविधाजनक बनाने में राजस्व, स्टाम्प और पंजीकरण विभागों के अधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा किया।
भाषा शुभम सुरेश
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