मुंबई, 31 मई (भाषा) महाराष्ट्र के अकोला जिले में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की एक महिला पदाधिकारी ने 1966 में स्थापना के बाद के 50 वर्षों के दौरान अविभाजित शिवसेना द्वारा किए गए मानवीय कार्यों पर शोध करके पीएचडी की उपाधि हासिल की है।
दिवंगत बाल ठाकरे ने 19 जून 1966 को शिवसेना की स्थापना की थी। पार्टी का मुख्य उद्देश्य ‘‘भूमिपुत्रों’’ (स्थानीय मराठीभाषी लोगों) के अधिकारों की रक्षा करना था। इससे छह वर्ष पहले 1960 में उन्होंने मराठी व्यंग्य और साप्ताहिक राजनीतिक कार्टून पत्रिका ‘मार्मिक’ की शुरुआत की थी।
हालांकि, स्थापना के 56 वर्ष बाद जून 2022 में शिवसेना में विभाजन हो गया, जब पार्टी नेता एकनाथ शिंदे ने पार्टी अध्यक्ष और महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी।
वर्तमान में सत्तारूढ़ शिवसेना का नेतृत्व एकनाथ शिंदे कर रहे हैं, जबकि उद्धव ठाकरे विपक्षी शिवसेना (उबाठा) के प्रमुख हैं।
शिवसेना (उबाठा) की अकोला जिले की महिला संघटक सरिता विजय वाकोडे ने बताया कि उन्होंने ‘‘शिवसेना के मानवतावादी कार्यों का ऐतिहासिक अध्ययन: मुंबई मंडल के विशेष संदर्भ में (1960-2010)’’ शीर्षक से अपना शोध पत्र संत गाडगे बाबा अमरावती विद्यापीठ में जमा किया था। विश्वविद्यालय ने उन्हें 26 मई को पीएचडी की उपाधि प्रदान की।
वाकोडे ने बताया कि उन्होंने इस शोध पर लगभग छह वर्षों तक काम किया और 450 पृष्ठों का शोध पत्र तैयार किया।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि उनका सपना पीएचडी कर ‘‘डॉक्टर’’ की उपाधि प्राप्त करना था।
उन्होंने 2014 में इतिहास विषय में परास्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद मराठी विषय में एमए और फिर बी.एड. किया। वह 2016 में शिवसेना से जुड़ीं और 2017 में पीएचडी के लिए आवेदन किया। महाराष्ट्र के निर्माण में शिवसेना की भूमिका और योगदान पर आधारित उनके शोध विषय को 2020 में स्वीकृति मिल गई थी।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा लक्ष्य राजनीतिक कार्यकर्ताओं को शिवसेना की उस मूल विचारधारा के बारे में शिक्षित करना है जिसमें राजनीति में मानवीय दृष्टिकोण को महत्व दिया गया है। प्रेम, स्नेह, त्याग और कड़ी मेहनत के जरिए ही राज्य और देश का निर्माण किया जा सकता है।’’
वरिष्ठ पत्रकार योगेश त्रिवेदी के अनुसार, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष दिवंगत मनोहर जोशी ने भी भारत में क्षेत्रीय राजनीतिक दलों, विशेष रूप से शिवसेना पर शोध करके मुंबई विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी। उन्होंने 72 वर्ष की आयु में अपना शोध कार्य पूरा किया था।
भाषा गोला सुरभि
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