मुंबई, 20 जुलाई (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने कोल्हापुर के एक आश्रम स्कूल के प्रधानाचार्य और शिक्षक द्वारा 2025 में एक नाबालिग लड़की के कथित यौन उत्पीड़न की पुलिस जांच को ‘लापरवाहीपूर्ण’ बताते हुए उसकी कड़ी आलोचना की। अदालत ने इस मामले की जांच महाराष्ट्र के अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) को सौंप दी है।
न्यायमूर्ति वृषाली जोशी और न्यायमूर्ति संदेश पाटिल की कोल्हापुर सर्किट पीठ ने कहा कि वह पुलिस अधीक्षक (एसपी) के इस दावे से ‘अचंभित’ है कि कोई महिला आईपीएस अधिकारी उपलब्ध नहीं है। पीठ ने जांच दल के ‘ढुलमुल रवैये’ और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की पूर्ण अनदेखी करने पर कड़ी नाराजगी जताई।
इस मामले में अदालत द्वारा 13 जुलाई को पारित आदेश की प्रति सोमवार को उपलब्ध हुई।
पीड़िता के माता-पिता ने पुलिस जांच पर असंतोष जताते हुए इसे किसी स्वतंत्र एजेंसी को हस्तांतरित करने की मांग को लेकर उच्च न्यायालय का रुख किया था।
शिकायत के अनुसार, आश्रम स्कूल के प्रधानाचार्य और एक शिक्षक ने नाबालिग पीड़िता को गलत ढंग से छुआ और उसका शारीरिक उत्पीड़न किया था।
दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पॉक्सो कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
अदालत ने पुलिस द्वारा केस डायरी के रखरखाव के तरीके पर भी नाराजगी जताई और देखा कि इसमें केवल अलग-अलग पन्ने लगे हुए थे। पीठ ने कहा, ‘हम जांच अधिकारी के ढुलमुल रवैये और कानून के प्रावधानों, खासकर पॉक्सो कानून के बारे में उनकी पूरी अज्ञानता से स्तब्ध हैं।’ अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि आरोपियों के खिलाफ दो प्राथमिकियां दर्ज हैं।
पीठ ने इस अपराध को जघन्य प्रकृति का बताते हुए कहा, ‘‘हम संतुष्ट हैं कि पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए अदालत द्वारा अपनी शक्तियों का उपयोग करने का यह एक बिल्कुल उपयुक्त मामला है।’
अदालत ने जांच को राज्य सीआईडी को स्थानांतरित करने का आदेश दिया और एजेंसी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) को व्यक्तिगत रूप से इस मामले की पड़ताल करने का निर्देश दिया।
भाषा सुमित सुरेश
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