नागपुर, पांच जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने युवाओं में मानसिक मजबूती की तत्काल आवश्यकता पर जोर देते हुए रविवार को कहा कि पारिवारिक मार्गदर्शन की कमी और अत्यधिक ‘स्क्रीन टाइम’ (अधिक समय के लिए मोबाइल, टीवी, लेपटॉप और कंप्यूटर का इस्तेमाल) के कारण बच्चे लगातार कमजोर होते जा रहे हैं।
नागपुर में ‘सनमर्ग माइंड वेलनेस सेंटर’ के उद्घाटन के अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि नयी पीढ़ी को बातचीत की जरूरत है, और उनके अकेलेपन को दूर करना होगा जो उनके भीतर घर कर जाता है।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि समाज को युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए।
सरसंघचालक ने उल्लेख किया कि पांडवों के संघर्ष और चुनौतियों जैसी पौराणिक कथाएं कभी युवा मनों को शक्ति प्रदान करती थीं, लेकिन आज की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
भागवत ने पूछा, ‘‘12वीं कक्षा में अनुत्तीर्ण हो गए, तो वे आत्महत्या कर लेते हैं। घर में डांट पड़ी, तो वे भाग जाते हैं या कोई आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। मन इस स्थिति में कैसे पहुंच गया?’’
उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि आज बच्चों को दादी-नानी द्वारा पारंपरिक कहानियों के माध्यम से मार्गदर्शन देने के बजाय, कम उम्र से ही टेलीविजन के सामने छोड़ दिया जाता है या मोबाइल फोन दे दिया जाता है।
भागवत ने रेखांकित किया कि दादी-नानी की अनुपस्थिति और माता-पिता द्वारा समय न दिए जाने के कारण बच्चे अलग-थलग और अकेले हो गए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘नयी पीढ़ी को बातचीत की जरूरत है। हमें उस अकेलेपन को दूर करना होगा जो उनके भीतर घर कर जाता है, और यदि वे गलतियां कर रहे हैं, तो यह अक्सर हमारे अपने मार्गदर्शन की विफलता है।’’
भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि घरों और समाज, दोनों की प्राथमिक जिम्मेदारी एक ऐसी मानसिकता विकसित करना है जो जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि नई पीढ़ी कमजोर न बने।
उन्होंने दावा किया कि मानसिक स्वास्थ्य की चुनौती इतनी व्यापक है कि इसे अकेले चिकित्सा पेशेवर हल नहीं कर सकते, इसके लिए माता-पिता और बड़ों के सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है।
उन्होंने आधुनिक पद्धतियों के साथ भारत की प्राचीन ज्ञान प्रणालियों को एकीकृत करके एक ‘‘उन्नत भारतीय मनोविज्ञान’’ विकसित करने का भी आह्वान किया। ‘सनमार्ग माइंड वेलनेस सेंटर’ की सराहना करते हुए, भागवत ने बच्चों को घरों, स्कूलों और स्थानीय समुदायों के माध्यम से जीवन की चुनौतियों का सीधे सामना करने के लिए तैयार करने के उनके प्रयासों को पूरा समर्थन देने का वादा किया।
भाषा
खारी रंजन
रंजन