(फाइल फोटो के साथ)
मुंबई, दो जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के सत्तारूढ़ गठबंधन महायुति के प्रत्याशी के तौर पर विधानपरिषद के उपसभापति पद के लिए निर्वाचित हुए सचिन अहीर ने बृहस्पतिवार को अपनी भविष्य की राजनीतिक भूमिका को लेकर लगाई जा रही अटकलों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘मुझे पहले अपनी पारी खेलने दीजिए।’’
वैसे अहीर विपक्षी शिवसेना (उबाठा) के विधानपरिषद सदस्य हैं।
वह शिवसेना के प्रमुख एवं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दे रहे थे कि क्रिकेट के जादूगर सचिन तेंदुलकर की तरह अहीर ‘बड़ी पारी’ खेलेंगे।
अहीर ने मंगलवार को विधानपरिषद के उपसभापति पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया था। उसके बाद शिंदे ने यह टिप्पणी की थी।
अहीर ने आज विधानभवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘मुझे लगता है कि मैं अकेला ही काफी हूं, इसलिए पहले मुझे अपनी पारी खेलने दीजिए। पहले मुझे अच्छा स्कोर बना लेने दीजिए, उसके बाद हम और खिलाड़ियों को शामिल करने के बारे में बात करेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘शिवसेना कार्यकर्ताओं समेत वर्ली के लोग मेरे साथ हैं। आख़िरकार, वे मेरे ही कार्यकर्ता हैं।’’
शिवसेना (उबाठा) नेता आदित्य ठाकरे के भरोसेमंद सहयोगी माने जाने वाले अहीर ने मंगलवार को उस समय सबको चौंका दिया, जब उन्होंने सत्ताधारी शिवसेना के उम्मीदवार के तौर पर उपसभापति पद के चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया।
मुंबई के वर्ली विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक अहीर ने तत्कालीन अविभाजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता के तौर पर यह सीट जीती थी और बाद में राज्य मंत्री के तौर पर अपनी सेवा दी।
उन्हें 2029 के विधानसभा चुनाव में वर्तमान विधायक आदित्य ठाकरे के खिलाफ भावी शिवसेना प्रत्याशी के रूप में देखा जा रहा है।
आदित्य ठाकरे ने दावा किया है कि अहीर ने (उपसभापति पद के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद) उन्हें बताया था कि वह 2029 का विधानसभा चुनाव वर्ली से नहीं लड़ेंगे।
हालांकि शिवसेना (उबाठा) नेता आदित्य ठाकरे ने यह भी कहा कि उन्हें ऐसे आश्वासन पर भरोसा नहीं है।
शिवसेना (उबाठा) से अहीर का निकल जाना, मध्य मुंबई के वर्ली से विधायक आदित्य ठाकरे के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
अंडरवर्ल्ड डॉन से नेता बने अरुण गवली के भतीजे अहीर, अविभाजित राकांपा के तीन बार विधायक रहे और 1999-2014 के दौरान कांग्रेस-राकांपा गठबंधन की सरकार में मंत्री भी रहे।
वह अविभाजित राकांपा की मुंबई इकाई के प्रमुख भी रहे हैं। अहीर 2014 में अविभाजित शिवसेना के प्रत्याशी सुनील शिंदे के हाथों विधानसभा चुनाव हार गये थे।
आदित्य ठाकरे के 2019 में पहला विधानसभा चुनाव लड़ने और विजयी होने से पहले अहीर अविभाजित शिवसेना में शामिल हुए थे। तब से अहीर आदित्य के करीब थे और उन्हें श्रमिक संगठन समेत पार्टी से जुड़े कई संगठनों की जिम्मेदारी दी गयी ।
अहीर 2022 में विधानपरिषद के सदस्य चुने गए थे और सदन में उनका कार्यकाल 2028 तक है।
भाषा राजकुमार पवनेश
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