मुंबई, नौ फरवरी (भाषा) संगीत जगत में तीन दशक पूरे कर चुके मशहूर गायक लकी अली का कहना है कि अपने करियर के दौरान उन्हें जो प्यार और सराहना मिली है, वह उनके लिए एक ऐसा उपहार है, जिसके वे खुद को योग्य नहीं मानते।
“गोरी तेरी आंखें कहें”, “तेरी याद जब आती है”, ‘‘ना तुम जानो ना हम”, “एक पल का जीना” तथा “जाने क्या ढूंढता है” जैसे गीतों से पहचान बनाने वाले लकी अली अपने नए गीत “तू जाने है कहां” के साथ एक बार फिर अपने अनूठे अंदाज में लौटे हैं। यह गीत टिप्स म्यूजिक के बैनर तले रिलीज हुआ है।
लकी अली ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक वर्चुअल साक्षात्कार में कहा कि वह इस बात के लिए ईश्वर के आभारी हैं कि उन्हें यह अवसर और दशकों तक लगातार दर्शकों का प्यार मिला। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि मैं इसका हकदार हूं। यह मुझे मिला एक उपहार है, जिसका मैंने हमेशा सम्मान किया है। मैंने कभी अपने करियर का दुरुपयोग नहीं किया। यह लोगों की महानता है जो आपको इतना प्यार देते हैं।”
उन्होंने कहा कि वह जानते हैं कि प्यार और सफलता स्थायी नहीं होती। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि कुछ भी स्थायी नहीं है और किसी न किसी मोड़ पर यह सब थम जाएगा। मैं इसके लिए भी तैयार हूं और इससे चिपके रहने की कोशिश नहीं करता। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, हम खुद को और बेहतर समझने की कोशिश करते हैं।”
लकी अली ने 1996 में अपने पहले एल्बम “सुनो” से संगीत यात्रा की शुरुआत की थी, जिसमें उनका मशहूर गीत “ओ सनम” शामिल था। इस एल्बम ने उन्हें भारतीय गायकों में एक प्रमुख चेहरा बना दिया।
उन्होंने कहा, “मैं किसी और के लिए गाने नहीं गाता, मैं अपने लिए गाता हूं। जो भी काम मैंने किया, वह भीतर से आया।”
लकी अली के लिए संगीत दूसरों तक अपनी बात पहुंचाने और दूसरों से जुड़ने का जरिया है।
उन्होंने बताया कि उनका नया गीत उनके निजी संघर्षों और उलझनों को दर्शाता है।
भाषा मनीषा वैभव
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