महाराष्ट्र : नीट पुनर्परीक्षा देने के लिए पॉक्सो मामले के 18 वर्षीय आरोपी को चार दिन की अंतरिम जमानत

महाराष्ट्र : नीट पुनर्परीक्षा देने के लिए पॉक्सो मामले के 18 वर्षीय आरोपी को चार दिन की अंतरिम जमानत

महाराष्ट्र : नीट पुनर्परीक्षा देने के लिए पॉक्सो मामले के 18 वर्षीय आरोपी को चार दिन की अंतरिम जमानत
Modified Date: June 19, 2026 / 10:57 am IST
Published Date: June 19, 2026 10:57 am IST

मुंबई, 19 जून (भाषा) विशेष पॉक्सो अदालत ने बलात्कार के आरोप में जेल में बंद 18 वर्षीय युवक को 21 जून को होने वाली नीट पुनर्परीक्षा में शामिल होने के लिए चार दिन की अंतरिम जमानत प्रदान की है।

विशेष न्यायाधीश एस.आर. शर्मा ने बृहस्पतिवार को यह राहत दी। आरोपी नवी मुंबई की तलोजा केंद्रीय कारागार में बंद है। अदालत ने यह आदेश तब पारित किया जब पीड़िता ने इस शर्त के साथ कोई आपत्ति नहीं जताई कि जमानत अवधि के दौरान आरोपी उसके परिवार को बदनाम या धमकाने का प्रयास नहीं करेगा।

अदालत ने आरोपी को 18 जून से 21 जून तक 50,000 रुपये के मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत पर अंतरिम राहत प्रदान की।

अदालत ने आरोपी को निर्देश दिया कि वह चिकित्सा प्रवेश परीक्षा की पुनर्परीक्षा के अगले दिन 22 जून को दोपहर दो बजे से पहले संबंधित अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करे।

आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत बलात्कार तथा लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज है।

आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ता कपिल विश्वास जोडगे ने दलील दी कि आपराधिक न्याय प्रणाली का उद्देश्य दोषसिद्ध अपराधियों और कारावास में बंद व्यक्तियों के पुनर्वास को भी बढ़ावा देना है तथा युवक को चिकित्सा प्रवेश परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि परीक्षा की तैयारी के लिए आरोपी को समय की आवश्यकता है और पुलिस अभिरक्षा में परीक्षा देने से उसकी मानसिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।

विशेष लोक अभियोजक चैत्राली पनशीकर ने आरोपों की गंभीरता का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत याचिका का विरोध किया। अभियोजन पक्ष ने सुझाव दिया कि आरोपी को केवल एक दिन के लिए पुलिस सुरक्षा में परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जानी चाहिए।

बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत उच्च माध्यमिक परीक्षा प्रमाणपत्र और नीट का अस्थायी प्रवेश पत्र (एडमिट कार्ड) देखने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपी को अंतरिम जमानत देने के लिए ‘‘स्पष्ट और वैध आधार’’ मौजूद हैं।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘अभियोजन पक्ष की आशंकाओं का समाधान आवश्यक शर्तें लगाकर किया जा सकता है।’’

अदालत ने आरोपी को रिहा करते हुए निर्देश दिया कि वह किसी भी माध्यम से पीड़िता से संपर्क नहीं करेगा, साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेगा और मामले से जुड़े किसी भी व्यक्ति को प्रलोभन या धमकी नहीं देगा।

अदालत ने आरोपी को यह लिखित आश्वासन देने का भी निर्देश दिया कि वह परीक्षा में शामिल होगा तथा आत्मसमर्पण के समय परीक्षा में शामिल होने से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करेगा।

भाषा मनीषा शोभना

शोभना


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