ठाणे, 21 जून (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने महाराष्ट्र के ठाणे शहर के नगर निकाय पर गड़बड़ी और कुप्रबंधन का रविवार को आरोप लगाया और केंद्र की योजनाओं के तहत 1,750 करोड़ रुपये से अधिक राशि मिलने के बावजूद पानी की अनियमित आपूर्ति को लेकर एक ‘श्वेत पत्र’ जारी करने की मांग की।
स्थानीय विधायक संजय केलकर ने एक संवाददाता सम्मेलन में चेतावनी दी कि अगर नगर निकाय समय-सीमा के भीतर कोई कार्य योजना लागू नहीं करता है, तो वे लोग जन-आंदोलन शुरू करेंगे। इस संवाददाता सम्मेलन में विधान परिषद के दो सदस्य -निरंजन डावखरे और माधवी नाइक- भी मौजूद थे।
तीनों ने एक विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट जारी की, जिसमें ठाणे में पानी के आवंटन, स्मार्ट मीटरिंग लागू करने, टैंकर प्रणाली और निविदा में पारदर्शिता से जुड़ी कमियों को उजागर किया गया।
नेताओं ने कहा, ‘‘संपत्ति कर, जलकर, और विकास शुल्क नियमित रूप से भरने के बावजूद, कई इलाकों में पानी की आपूर्ति भरोसे लायक नहीं है और लोग निजी टैंकर पर निर्भर हैं। अगर ठाणे नगर निगम जनता के पैसे का हिसाब-किताब साफ तौर पर नहीं देता है, तो शहर को गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा।’’
उन्होंने ‘अमृत 2.0’ योजना लागू करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए। सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि शहर में जलापूर्ति, मलजल शोधन संयंत्र के लिए 1,750.82 करोड़ रुपये की परियोजना तय की गयी है।
विधान परिषद सदस्य नाइक ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से भेजी गई बड़ी धनराशि लोगों के लिए है। यह राशि सिर्फ़ कागजों में ही नहीं रहनी चाहिए; यह नागरिकों के लिए पानी के नलों, सड़कों और उनके जीवन स्तर में दिखना चाहिए।’’
उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी ‘‘एक-एक रुपये और पानी की एक-एक बूंद’’ का हिसाब मांगेगी।
उन्होंने नगर निकाय की ‘स्मार्ट मीटरिंग’ परियोजना में भी भारी अनियमितताओं की ओर इशारा किया।
उन्होंने बताया कि शहर में छह लाख से ज़्यादा संपत्तियां हैं, लेकिन स्मार्ट या ऑटोमेटेड मीटर रीडिंग (एएमआर) प्रणाली सिर्फ़ लगभग एक लाख कनेक्शन पर ही लागू की गयी है।
भाषा
सुरेश अविनाश
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