मुंबई, 13 मार्च (भाषा) देवेंद्र फडणवीस नीत सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में महाराष्ट्र धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक 2026 पेश किया, जिसमें दबाव, धोखाधड़ी, प्रलोभन या विवाह के माध्यम से कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं।
इस विधेयक के अनुसार, विवाह के बहाने गैरकानूनी रूप से धर्म परिवर्तन कराने वालों को सात साल की कैद की सजा दी जाएगी और उन पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
विधेयक में नाबालिग, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति, महिला या अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति के संबंध में उल्लंघन होने पर सात वर्ष तक के कारावास और पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
विधेयक के अनुसार, सामूहिक धर्मांतरण के लिए सात साल की कैद होगी और पांच लाख रुपये का जुर्माना लगेगा। विधेयक में प्रस्ताव है कि बार-बार ऐसा अपराध करने वाले व्यक्तियों को 10 साल की कैद होगी और पांच लाख रुपये का जुर्माना भी हो सकता है।
इस विधेयक के अनुसार, थाना प्रभारी के लिए किसी भी व्यक्ति द्वारा की गई शिकायत को दर्ज करना अनिवार्य है।
मसौदे के अनुसार, यह विधेयक धर्म की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करने तथा प्रलोभन, बल, गलतबयानी, अनुचित प्रभाव या धोखाधड़ी के माध्यम से किए गए धर्मांतरण पर प्रतिबंध लगाने के लिए है।
यदि यह कानून बन जाता है, तो महाराष्ट्र उन राज्यों में शामिल हो जाएगा जो इस तरह का कानून बना चुके हैं। ऐसे राज्य उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड हैं।
विधानसभा में यह विधेयक पेश करते हुए गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने कहा, ‘‘इसका उद्देश्य धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करना है। इसका उद्देश्य दबाव, धोखाधड़ी, प्रलोभन या विवाह के माध्यम से किए जाने वाले गैरकानूनी धर्मांतरण पर रोक लगाना है।’’
भाषा राजकुमार दिलीप
दिलीप