यूसीसी को लेकर हितधारकों के साथ विचार-विमर्श कर रही महाराष्ट्र सरकार

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यूसीसी को लेकर हितधारकों के साथ विचार-विमर्श कर रही महाराष्ट्र सरकार

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  • Publish Date - March 20, 2026 / 03:40 PM IST,
    Updated On - March 20, 2026 / 03:40 PM IST

मुंबई, 20 मार्च (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि वह समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श कर रही है।

भाजपा के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) परिणय फुके ने राज्य विधान परिषद में उत्तराखंड की तर्ज पर एक कानून लाने की मांग की है, जो सभी धर्मों के नागरिकों के लिए समान कानून को बढ़ावा दे। उनकी मांग पर सरकार ने यह बयान दिया है।

फुके ने बुधवार को ध्यानाकर्षण के जरिए यह मुद्दा उठाया था। संयोग से, उसी दिन गुजरात की भाजपा सरकार ने भी राज्य में यूसीसी लागू करने के लिए एक विधेयक पेश किया था।

हालांकि, परिषद को बताया गया कि सरकार को फुके के प्रस्ताव का जवाब देने के लिए और समय चाहिए, क्योंकि वह विभिन्न पक्षों के साथ चर्चा कर रही है।

परिषद की उपसभापति नीलम गोरहे ने कहा, “हमें मंत्री का पत्र मिला है कि यह मुद्दा कई विभागों से जुड़ा है। चूंकि यह महत्वपूर्ण विषय है, सभी विभागों को एक महीने में लिखित जवाब देना चाहिए। यदि जवाब नहीं मिलता है, तो सभापति या हमें (पीठ को) सूचित करें, हम बैठक करेंगे।”

उन्होंने कहा कि इस विषय पर कानून एवं न्यायपालिका, महिला एवं बाल विकास और सामान्य प्रशासन विभाग से परामर्श आवश्यक है, और एक व्यापक जवाब की जरूरत है।

गोरे ने कहा, “यह एक महत्वपूर्ण कानून है। सरकार इस ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देना चाहती है, इसलिए इसे कई विभागों को भेजा गया है।”

फुके का कहना है कि संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि समान नागरिक संहिता के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा है कि विवाह, तलाक और गोद लेने के लिए अलग-अलग कानून हैं और सभी नागरिकों के लिए समान कानून होने चाहिए।

एमएलसी ने कहा कि उत्तराखंड में इस संबंध में कानून है और महाराष्ट्र को भी ऐसा ही कानून लाने की आवश्यकता है।

भाषा जोहेब दिलीप

दिलीप