महाराष्ट्र सरकार ने हिंसक चरमपंथ का महिमामंडन करने वाले प्रतिबंधित संगठनों के साहित्य पर रोक लगाई

महाराष्ट्र सरकार ने हिंसक चरमपंथ का महिमामंडन करने वाले प्रतिबंधित संगठनों के साहित्य पर रोक लगाई

महाराष्ट्र सरकार ने हिंसक चरमपंथ का महिमामंडन करने वाले प्रतिबंधित संगठनों के साहित्य पर रोक लगाई
Modified Date: August 7, 2026 / 01:30 pm IST
Published Date: August 7, 2026 1:30 pm IST

मुंबई, सात अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने ‘‘हिंसक चरमपंथ एवं जिहाद का महिमामंडन और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाले संगठन इस्लामिक स्टेट, ‘इस्लामिक स्टेट इन खुरासान प्रोविंस’, हिज्बुल मुजाहिदीन पीर पंजाल रेजिमेंट तथा अल-कायदा के साहित्य पर प्रतिबंध लगा दिया है।

गृह विभाग की ओर से छह अगस्त को जारी एक राजपत्र अधिसूचना में राज्य सरकार ने अधिकारियों को कट्टरपंथी साहित्य से जुड़ी पत्रिकाओं और किताबों समेत 114 वस्तुओं को जब्त करने का भी निर्देश दिया।

अधिसूचना में कहा गया है कि खुफिया सूचनाओं, साइबर निगरानी रिपोर्ट और राज्य के आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) की जांच से पता चला है कि आतंकवादी और गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल या उनका समर्थन करने वाले संगठनों से जुड़े ‘‘कट्टरपंथी और चरमपंथी साहित्य, प्रकाशन और दुष्प्रचार सामग्री’’ का प्रसार, कब्जा और आदान-प्रदान लगातार जारी है।

इसमें कहा गया है, ‘‘ऐसी सामग्री में हिंसक चरमपंथ और जिहाद का महिमामंडन करने, कट्टरपंथ को बढ़ावा देने, वैचारिक रूप से प्रभावित करने, भर्ती प्रक्रिया में मदद करने तथा भारत की संप्रभुता और अखंडता को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों की खातिर उकसाने या प्रोत्साहित करने वाली सामग्री पाई गई है। इससे लोक व्यवस्था, सांप्रदायिक सद्भाव और आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा होता है।’’

अधिसूचना में कहा गया है कि पिछले साल मार्च में पुलिस और एटीएस के वरिष्ठ अधिकारियों ने सरकार को सूचित किया था कि कुछ समाचार पत्रों, पुस्तकों, दस्तावेजों और अन्य सामग्री, जिनमें पेंटिंग और तस्वीरें भी शामिल हैं, को जब्त किया जाना जरूरी है क्योंकि इनसे भारत की संप्रभुता और अखंडता, देश की सुरक्षा तथा लोक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को अंजाम दिया जाता है।

इसमें कहा गया है, ‘‘राज्य सरकार इस बात से संतुष्ट है कि यह सामग्री आतंकवादी संगठनों से जुड़ी है। इनमें इस्लामिक स्टेट (आईएस/आईएसआईएस), इस्लामिक स्टेट इन खुरासान प्रोविंस (आईएसकेपी), हिज्बुल मुजाहिदीन पीर पंजाल रेजिमेंट, अल-कायदा और ‘गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967’ की पहली अनुसूची में शामिल अन्य संगठन शामिल हैं। साथ ही, ऐसी सामग्री का प्रसार करने वाली संबंधित वेबसाइट, सोशल मीडिया मंच, एन्क्रिप्टेड चैनल और डिजिटल नेटवर्क भी इसमें शामिल हैं।’’

अधिसूचना में कहा गया कि ऐसी सामग्री का प्रकाशन, प्रसार, वितरण, बिक्री, प्रदर्शन, अपने पास रखना और भंडारण, चाहे वह भौतिक रूप में हो या डिजिटल माध्यम से, भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए घातक है।

इसमें कहा गया कि प्रतिबंधित 114 साहित्यिक सामग्री में ‘‘वॉइस ऑफ खुरासान’’ पत्रिका के 44 अंक, ‘‘आर यू स्टिल सिटिंग’’, ‘‘व्हाई शुड यू जॉइन द इस्लामिक स्टेट’’ और ‘‘निदा-ए-खुरासान-1 उर्दू’’ शामिल हैं। ये सभी इस्लामिक स्टेट/इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड लेवेंट (आईएसआईएल)/इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस)/दाएश/इस्लामिक स्टेट इन खुरासान प्रांत (आईएसकेपी)/आईएसआईएस विलायत खुरासान/इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड द शाम-खुरासान (आईएसआईएस-के) से संबंधित बताए गए हैं।

हिज्बुल मुजाहिदीन/हिज्बुल मुजाहिदीन पीर पंजाल रेजिमेंट से जुड़ी ‘‘द रिवोल्यूशनरी रिसर्जेंस’’ पत्रिका के अंक और ‘‘अल-कायदा/अल-कायदा इन इंडियन सब-कॉन्टिनेंट’’ से जुड़ी ‘‘नवाई गजवा-ए-हिंद’’, ‘‘स्कूल ऑफ यूसुफ’’ और ‘‘मॉडर्न वारफेयर’’ को भी प्रतिबंधित किया गया है।

भाषा सुरभि सुभाष

सुभाष


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