महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई भूमि निविदा में अनियमितताओं की जांच के आदेश दिए; परियोजना रोकी

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महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई भूमि निविदा में अनियमितताओं की जांच के आदेश दिए; परियोजना रोकी

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  • Publish Date - March 18, 2026 / 05:19 PM IST,
    Updated On - March 18, 2026 / 05:19 PM IST

मुंबई, 18 मार्च (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को मुंबई के मलाड इलाके में परियोजना-प्रभावित लोगों से संबंधित परियोजना के लिए भूमि निविदा प्रक्रिया में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की जांच के आदेश दिये और यह भी निर्देश दिया कि जांच पूरी होने तक कोई और कार्रवाई न की जाए।

शहरी विकास राज्य मंत्री माधुरी मिसल ने विधानसभा को बताया कि इस मामले की जांच एक अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा की जाएगी और इस संबंध में नगर निगम को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे।

यह मुद्दा कांग्रेस सदस्य असलम शेख द्वारा ध्यानाकर्षण नोटिस के माध्यम से उठाया गया था, जिसमें योगेश सागर और एम. पटेल (दोनों भाजपा विधायक) सहित विभिन्न सदस्यों द्वारा पूरक प्रश्न पूछे गए थे।

सदस्यों ने आरोप लगाया कि भूमि आवंटन मामले में, डेवलपर को हस्तांतरणीय विकास अधिकार (टीडीआर) और देय राशि से कहीं अधिक प्रीमियम प्रदान किया गया था, जिससे संभावित भ्रष्टाचार की आशंकाएं बढ़ गईं।

उन्होंने सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा मामले की जांच की मांग की।

इन चिंताओं का जवाब देते हुए, मिसल ने कहा कि सरकार आगे की कार्रवाई तय करने से पहले वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से विस्तृत जांच करेगी।

शेख ने मलाड (पूर्वी) में परियोजना प्रभावित व्यक्तियों के लिए आवास परियोजना में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया था।

उन्होंने दावा किया कि मूल रूप से पुलिस कर्मचारियों के आवासों के लिए आरक्षित भूमि को पीएपी आवास योजना के लिए स्थानांतरित कर दिया गया था, और अप्रैल 2025 के बाद प्रति आवास इकाई की लागत 32.21 लाख रुपये से बढ़कर 50.98 लाख रुपये हो गई थी।

विधायक ने कहा कि इस संशोधन के परिणामस्वरूप लगभग 618 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी नए सर्वेक्षण या स्वतंत्र मूल्यांकन के भूमि का मूल्यांकन 84,460 रुपये प्रति वर्ग मीटर से बढ़ाकर 1.33 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया, जिससे मिलीभगत की आशंका पैदा होती है।

विधायक ने निविदा शर्तों का कथित उल्लंघन करते हुए 50 प्रतिशत टीडीआर और प्रीमियम राशि अग्रिम रूप से दिए जाने को लेकर भी सवाल उठाया।

उन्होंने मामले की उच्च-स्तरीय जांच, संशोधित स्वीकृति पत्र (एलओए) को निलंबित करने और इसमें शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

मिसल ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि परियोजना का कार्यान्वयन ‘विकास योजना 2034’ और लागू नियमों के अनुसार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार, 40 प्रतिशत भूमि पुलिस आवास के लिए निर्धारित की गई है, जबकि शेष 60 प्रतिशत भूमि परियोजना-प्रभावित व्यक्तियों के आवास के लिए आवंटित की गई है। उन्होंने कहा कि संशोधित लागत पंजीकरण महानिरीक्षक द्वारा स्वीकृत अद्यतन मूल्यांकन के आधार पर तय की गई है।

मंत्री ने कहा कि उचित प्रक्रिया का पालन किया गया और निविदा प्रक्रिया पारदर्शी थी तथा भुगतान निर्धारित शर्तों के अनुसार विभिन्न चरणों में किए गए थे।

उन्होंने परियोजना के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की अनियमितता से इनकार किया।

भाषा तान्या सुरेश

सुरेश

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