महाराष्ट्र: शिक्षण संस्थानों को ‘‘जल्दबाजी में’’ अल्पसंख्यक दर्जा देने के मामले में अधिकारी पदच्युत

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महाराष्ट्र: शिक्षण संस्थानों को ‘‘जल्दबाजी में’’ अल्पसंख्यक दर्जा देने के मामले में अधिकारी पदच्युत

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  • Publish Date - February 18, 2026 / 02:23 PM IST,
    Updated On - February 18, 2026 / 02:23 PM IST

मुंबई, 18 फरवरी (भाषा) महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मौत के बाद 75 शिक्षण संस्थानों को कथित तौर पर जल्दबाजी में अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने के मामले में राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी का नाम सामने आने के बाद उसे पद से हटा दिया गया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा अनुमोदन पर रोक लगाए जाने के एक दिन बाद, अल्पसंख्यक विकास विभाग के उप सचिव मिलिंद पद्मनाभ शेनॉय के खिलाफ यह कार्रवाई मंगलवार को की गई।

उन्होंने कहा कि शेनॉय को उनके पद से मुक्त कर दिया गया है और उन्हें कोई अन्य जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है।

पवार और चार अन्य लोगों की 28 जनवरी की सुबह पुणे जिले के बारामती में विमान दुर्घटना में मौत हो गई थी।

अधिकारियों के अनुसार, पहला अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र 28 जनवरी को अपराह्न तीन बजकर नौ मिनट पर जारी किया गया और उसी दिन सात संस्थानों को मंजूरी मिली। अगले तीन दिन में कुल संख्या बढ़कर 75 हो गई।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह पता लगाने के लिए उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं कि ये स्वीकृतियां कैसे दी गईं, क्या उचित प्रक्रिया का पालन किया गया और क्या अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र जारी करने पर पहले से लगी किसी रोक को औपचारिक रूप से हटाया गया था।

अधिकारी ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने पूरे घटनाक्रम को लेकर एक व्यापक रिपोर्ट मांगी है। यदि कोई अनियमितता या प्रक्रियागत चूक पाई जाती है तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।’’

उन्होंने कहा कि मौजूदा उपमुख्यमंत्री और अल्पसंख्यक विकास मंत्री सुनेत्रा पवार ने अधिकारियों को मामले की जांच करने और किसी अनुचित कार्य का पता चलने पर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

यह मामला तब सामने आया, जब कुछ खबरों में दावा किया गया कि कई मंजूरियां नियमित कार्यालय समय के बाद जारी की गईं।

भाषा सिम्मी मनीषा

मनीषा