भारत को एआई के आधारभूत ढांचे में निवेश बढ़ाना होगा; कर-छूट की घोषणा बड़ा अवसर: एनवीडिया

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भारत को एआई के आधारभूत ढांचे में निवेश बढ़ाना होगा; कर-छूट की घोषणा बड़ा अवसर: एनवीडिया

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  • Publish Date - February 18, 2026 / 02:28 PM IST,
    Updated On - February 18, 2026 / 02:28 PM IST

नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) भारत को कृत्रिम मेधा (एआई) में मौजूदा 1.2 अरब डॉलर के निवेश को वैश्विक स्तर के अनुरूप बढ़ाने की जरूरत है और बजट में विदेशी कंपनियों को 20 वर्ष की कर-छूट की घोषणा से कृत्रिम मेधा के विस्तार के लिए ‘‘आधारभूत ढांचा’’ तैयार होगा। यह बात बुधवार को एनवीडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कही।

चिप विनिर्माता कंपनी एनवीडिया में उद्यम कारोबार के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शंकर त्रिवेदी ने कहा कि दुनिया की करीब 2,000 बड़ी कंपनियों में से लगभग 1,800 की भारत में बड़े वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) हैं। इनमें इस समय 20 लाख से अधिक लोग काम कर रहे हैं और यह संख्या जल्द ही 30 लाख तक पहुंचने वाली है।

उन्होंने यहां ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में कहा, ‘‘ इन सभी वैश्विक क्षमता केंद्रों को स्थानीय स्तर पर ‘एआई कारखाना’ चाहिए, जहां से वे अपने डेटा, कारोबारी प्रक्रियाएं और बौद्धिक संपदा से लेकर बुद्धिमत्ता पर काम कर सकें। इसलिए बजट की यह घोषणा भारत के लिए बहुत बड़ा अवसर है। जैसा हम कहते हैं, यह आधारभूत ढांचा है।’’

केंद्रीय बजट 2026-27 में यह घोषणा की गई है कि भारत में डेटा केंद्र सेवाएं लेने वाली किसी भी विदेशी कंपनी को 2047 तक 20 वर्ष की कर-छूट मिलेगी। इससे इस आशंका का समाधान होगा कि उनकी वैश्विक आय पर भारतीय कर लगेगा।

वैश्विक कंपनी भारत में अपना डेटा केंद्र लगाए या किसी भारतीय डेटा केंद्र से सेवाएं ले, दोनों ही स्थितियों में कर व्यवस्था समान रहेगी जिससे सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित होंगे।

भारत में कृत्रिम मेधा को बढ़ावा देने के बारे में त्रिवेदी ने कहा कि आधारभूत ढांचे में 1.2 अरब डॉलर का निवेश सराहनीय है और इसका भरपूर उपयोग हो रहा है।

इस बीच, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम(एनपीसीआई) ने भारत के भुगतान तंत्र के लिए विशेष रूप से निर्मित अपने स्वायत्त एआई मॉडल की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एनवीडिया के साथ सहयोग की बुधवार को घोषणा की।

एनपीसीआई ने बयान में कहा कि यह पहल बड़े पैमाने पर, वास्तविक समय भुगतान प्रणालियों की बढ़ती आवश्यकताओं का समर्थन करेगी जिसमें विश्वास, मजबूती, सुरक्षा और तंत्र को सक्षम बनाने पर जोर दिया गया है।

एनपीसीआई के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी विशाल कनवती ने कहा, ‘‘एनवीडिया के साथ इस सहयोग के माध्यम से एनपीसीआई का लक्ष्य भारत के भुगतान तंत्र के लिए विशेष रूप से तैयार की गई एआई क्षमताओं को आगे बढ़ाना है। बड़े पैमाने पर वास्तविक समय के आधार पर भुगतान प्रणालियों के संचालन के हमारे अनुभव से प्रेरणा लेते हुए, यह पहल एक संप्रभु, भुगतान-आधारित एआई आधार बनाने के लिए तैयार की गई है जो भारत के नियामकीय एवं डेटा संप्रभुता आवश्यकताओं के अनुरूप रहते हुए विश्वास और सुरक्षा को मजबूत करती है।’’

भाषा निहारिका अजय

अजय