महाराष्ट्र ने ‘निष्क्रिय इच्छामृत्यु’ मामलों में निजी अस्पतालों में समिति बनाने का आदेश दिया
महाराष्ट्र ने ‘निष्क्रिय इच्छामृत्यु’ मामलों में निजी अस्पतालों में समिति बनाने का आदेश दिया
मुंबई, 17 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को एक निर्देश जारी किया, जिसमें निजी अस्पतालों में निष्क्रिय इच्छामृत्यु और ‘‘लिविंग विल’’ से जुड़े मामलों को देखने के लिए प्राथमिक और द्वितीयक मेडिकल बोर्ड बनाने की रूपरेखा बताई गई है।
‘लिविंग विल’ एक कानूनी दस्तावेज है, जिसमें कोई व्यक्ति यह तय करता है कि कि अगर वह भविष्य में किसी गंभीर बीमारी, दुर्घटना या अचेत अवस्था के कारण अपनी इच्छा बताने की स्थिति में नहीं रहा, तो उसका चिकित्सीय उपचार कैसे किया जाए।
राज्य के जनस्वास्थ्य विभाग का आदेश, हरीश राणा मामले में उच्चतम न्यायालय के 11 मार्च, 2026 के उस फ़ैसले पर आधारित है, जिसमें दोहराया गया था कि मरीज की ‘लिविंग विल’ के अनुसार जीवन बचाने वाले उपचार को रोकने के फैसलों की पड़ताल और मंजूरी निर्धारित मेडिकल बोर्ड से होनी चाहिए।
वर्ष 2013 से अचेत अवस्था में रहे राणा भारत के पहले ऐसे व्यक्ति बने जिन्हें निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी गई।
उच्चतम न्यायालय ने उन्हें दिए जा रहे कृत्रिम आहार और जीवनरक्षक चीजों को हटाने की अनुमति प्रदान कर दी थी तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली में उनकी मौत हो गई थी।
महाराष्ट्र सरकार के आदेश के अनुसार, किसी निजी अस्पताल में प्राथमिक मेडिकल बोर्ड का गठन अस्पताल के चिकित्सा निदेशक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी या चिकित्सा अधीक्षक करेंगे। इस बोर्ड में अध्यक्ष अस्पताल प्रशासक होंगे और साथ ही उपचार करने वाले चिकित्सा विशेषज्ञ, एक गहन देखभाल विशेषज्ञ और एक वरिष्ठ फिजिशियन या सर्जन शामिल होंगे।
मुंबई और मुंबई उपनगरीय जिलों के बाहर के अस्पतालों के लिए, जिला सिविल सर्जन के तहत एक द्वितीयक चिकित्सा बोर्ड का गठन किया जाएगा।
भाषा नेत्रपाल वैभव
वैभव

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