ठाणे, 23 अप्रैल (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने मानव तस्करी और देह व्यापार गिरोह चलाने के पांच आरोपियों को अभियोजन पक्ष के मामले में “गंभीर खामियों” का हवाला देते हुए बरी कर दिया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वसुधा एल भोसले ने 21 अप्रैल को पारित आदेश में मानव तस्करी के सामाजिक खतरे का जिक्र करते हुए इस बात पर जोर दिया कि अदालत एक कमजोर मामले में मौजूद खामियों को दुरूस्त नहीं कर सकती।
यह मामला 29 दिसंबर 2020 को ठाणे के मीरा रोड इलाके में की गई छापेमारी पर आधारित था, जिस दौरान दो महिलाओं को देह व्यापार गिरोह से मुक्त कराया गया था। इनमें से एक महिला बांग्लादेश और दूसरी पश्चिम बंगाल की थी।
अदालत ने पुलिस की जांच और अभियोजन पक्ष की दलीलों में व्याप्त खामियों को रेखांकित किया।
उसने कहा कि आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाने वाले पुलिस अधिकारी से पूछताछ न किया जाना अभियोजन पक्ष के मामले में एक “गंभीर खामी” है।
अदालत ने कहा कि तस्करी के मामलों में पीड़ितों की गवाही बेहद महत्वपूर्ण होती है। उसने कहा कि पीड़ितों से पूछताछ न किए जाने से अभियोजन पक्ष सबसे प्रत्यक्ष और स्वाभाविक साक्ष्य से वंचित हो जाता है।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला काफी हद तक एक “फर्जी ग्राहक” पर आधारित था, जो बाद में अपने बयान से मुकर गया और गवाही दी कि उसने कभी भी किसी छापेमारी में हिस्सा नहीं लिया और न ही स्वेच्छा से गवाह के रूप में किसी पंचनामा पर हस्ताक्षर किए।
अदालत ने विजय बालकृष्ण कदम, विजय द्वारका यादव, विजय खुशियाल साव, शंभू सिद्धेश्वर साव और सतीश महाबला शेट्टी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 370(3) (मानव तस्करी) और देह व्यापार (रोकथाम) अधिनियम के तहत लगाए गए सभी आरोपों से बरी कर दिया।
भाषा पारुल सुभाष
सुभाष