नांदेड एवं लातूर में ‘मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम दिन’ मनाया गया,मंत्रियों का फसल-क्षति पर मदद का भरोसा
नांदेड एवं लातूर में 'मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम दिन' मनाया गया,मंत्रियों का फसल-क्षति पर मदद का भरोसा
लातूर/नांदेड़, 17 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र के लातूर और नांदेड जिलों में बृहस्पतिवार को ‘मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम दिन’ (मराठवाड़ा मुक्ति दिवस) मनाया गया तथा मंत्रियों ने क्षेत्र में सूखे जैसे हालात के बीच फसलों के नुकसान को लेकर किसानों की चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया।
लातूर के प्रभारी मंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले ने कहा कि कम बारिश के कारण खरीफ फसलों को व्यापक नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्थिति को गंभीरता से लिया है और इस संकट की घड़ी में वह किसानों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।
वह लातूर में शहीद स्मारक पर 78वें मराठवाड़ा मुक्ति दिवस के मौके पर ध्वजारोहण समारोह को संबोधित कर रहे थे। भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली थी, लेकिन मध्य महाराष्ट्र का मराठवाड़ा क्षेत्र 17 सितंबर 1948 को हैदराबाद के निजाम के शासन से मुक्त हुआ था।
भोसले ने कहा कि यदि मानसून की वापसी कमजोर रहती है तो लातूर जिले को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इस समय पानी की हर बूंद महत्वपूर्ण है, ऐसे में सिंचाई परियोजनाओं के पानी को पीने के लिए सुरक्षित रखा गया है।
उन्होंने कहा कि संकट की अवधि में पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने की योजनाएं भी बनाई जा रही हैं।
इससे पहले दिन में छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि आठ जिलों वाला मराठवाड़ा क्षेत्र (जिसमें लातूर और नांदेड भी हैं) इस बार सूखे की स्थिति का सामना कर रहा है।
पड़ोसी नांदेड जिले में प्रभारी मंत्री अतुल सावे ने कहा कि कम बारिश से फसलें प्रभावित हुई हैं। उन्होंने प्रभावित किसानों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ओर से उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया।
भाषा
शुभम राजकुमार
राजकुमार

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