पिता गुलजार की सदाबहार लोकप्रियता पर बोलीं मेघना गुलजार: उन्होंने खुद को लगातार नए रूप में ढाला है

पिता गुलजार की सदाबहार लोकप्रियता पर बोलीं मेघना गुलजार: उन्होंने खुद को लगातार नए रूप में ढाला है

पिता गुलजार की सदाबहार लोकप्रियता पर बोलीं मेघना गुलजार: उन्होंने खुद को लगातार नए रूप में ढाला है
Modified Date: September 13, 2026 / 04:08 pm IST
Published Date: September 13, 2026 4:08 pm IST

मुंबई, 13 सितंबर (भाषा) फिल्मकार मेघना गुलजार का मानना है कि उनके पिता गुलजार की लगातार खुद को नए रूप में ढालने और अपने समय की भाषा में बात करने की क्षमता ने उनकी कविताओं और गीतों को नयी पीढ़ी के बीच लोकप्रिय बनाया।

गुलजार ने पटकथा लेखक और निर्देशक के तौर पर कई समीक्षकों द्वारा सराही गई फिल्मों में काम करने के अलावा सात दशक से अधिक लंबे करियर में कई लोकप्रिय गीत भी लिखे हैं।

उनके लिखे लोकप्रिय गीतों में ‘आनंद’ का ‘‘मैंने तेरे लिए’’, ‘मासूम’ का ‘‘तुझसे नाराज नहीं जिंदगी’’, ‘इजाजत’ का ‘‘मेरा कुछ सामान’’, ‘आंधी’ का ‘‘तेरे बिना जिंदगी से कोई’’, ‘दिल से..’ का ‘‘छैंया छैंया’’ और ‘गुरु’ का ‘‘ऐ हैरते’’, शामिल हैं।

गुलजार के गीतों, कविताओं और शायरी को सोशल मीडिया पर भी नया जीवन मिला है। उनकी शायरी अक्सर इंस्टाग्राम रील्स में दिखाई देती है, जिसे मेघना ने ‘‘शानदार’’ बताया।

मेघना ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “एक ऐसी पीढ़ी ने उन्हें फिर से अपना लिया है, जो शायद कविता की दीवानी नहीं है, लेकिन उनकी (गुलजार) भावनाएं और शब्द उन्हें (नयी पीढ़ी) इस तरह छूते हैं कि वे उन्हें अपनी रील्स में साझा करने लगते हैं।”

उन्होंने कहा, ‘‘यह बहुत शानदार बात है कि वह उन पीढ़ियों के बीच भी इतनी गहरी छाप छोड़ते हैं, जो शायद उनके बारे में जानती तक नहीं हो। इसका एक कारण यह है कि उन्होंने लगातार खुद को नए रूप में ढाला और जिस समय में रहे, उस समय की भाषा का लगातार इस्तेमाल किया। उनके गीत और कविताएं इसे दर्शाते हैं, जो दुर्लभ होने के साथ-साथ बेहद खास भी है।’’

लेखिका-निर्देशक ने कहा कि उनके पिता ‘‘भाग्यशाली’’ हैं कि उन्हें दर्शकों के साथ इस तरह का दुर्लभ जुड़ाव मिला।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि लोगों के साथ यही जुड़ाव बनता है और इसलिए उनके शब्दों के माध्यम से, जो इतने आत्मीय लगते हैं, लोग सोचते हैं कि वे उन्हें जानते हैं। शायद वे जानते भी हैं, शायद यह उनके व्यक्तित्व का एक बड़ा हिस्सा है। मुझे लगता है कि यह जुड़ाव बेहद खास है।’’

भाषा

राखी दिलीप

दिलीप


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