मुंबई निकाय चुनाव: कांग्रेस नेता ने खराब प्रदर्शन के लिए वर्षा गायकवाड के इस्तीफे की मांग की

मुंबई निकाय चुनाव: कांग्रेस नेता ने खराब प्रदर्शन के लिए वर्षा गायकवाड के इस्तीफे की मांग की

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  • Publish Date - January 17, 2026 / 07:42 PM IST,
    Updated On - January 17, 2026 / 07:42 PM IST

मुंबई, 17 जनवरी (भाषा) मुंबई निकाय चुनाव में कांग्रेस को मिली अब तक की सबसे कम सीट के एक दिन बाद शनिवार को पार्टी में जारी गुटबाजी एक बार फिर से उभर आई और पार्टी के नेताओं ने नैतिक आधार पर नगर इकाई की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड के इस्तीफे की मांग उठाई।

कांग्रेस की मुंबई इकाई के मुख्य प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा हालांकि चुनाव जिन “प्रतिकूल” परिस्थितियों में हुए उन्हें देखते हुए पार्टी का प्रदर्शन संतोषजनक रहा।

वर्ष 2017 में हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव में कांग्रेस ने 227 में से 31 सीट पर जीत हासिल की थी, जो इस बार घटकर 24 रह गयी, जिसके बाद गायकवाड आलोचनाओं के घेरे में आ गईं।

कांग्रेस ने महाविकास आघाडी (एमवीए) के घटक दल के साथ चुनाव में गठबंधन नहीं किया था।

पार्टी ने वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए), रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई)-गवई के साथ मिलकर 152 सीट पर चुनाव लड़ा, हालांकि, सहयोगी दलों को एक भी सीट नहीं मिली।

इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जीत हासिल कर बीएमसी में उद्धव ठाकरे के परिवार का तीन दशक पुराना वर्चस्व समाप्त कर दिया।

भाजपा ने 89 सीट, जबकि शिवसेना ने 29 सीट पर जीत हासिल की।

वहीं विपक्षी शिवसेना (उबाठा) को 65 सीट और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने छह सीट पर जीत हासिल की।

एआईएमआईएम को आठ सीट, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को तीन, समाजवादी पार्टी को दो और राकांपा (शप) को सिर्फ एक सीट पर हासिल हुई।

कांग्रेस की मुंबई इकाई के पूर्व अध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य भाई जगताप ने नैतिक आधार पर गायकवाड से इस्तीफे की मांग की।

उन्होंने ‘पीटीआई-वीडियो’ को बताया, “जब उम्मीदवारों का चयन हुआ, तो मुझे बताया गया कि टिकट सर्वेक्षण के आधार पर बांटे गए हैं। मैंने उस समय आपत्ति नहीं जताई, लेकिन जब मैंने सर्वेक्षण रिपोर्ट मांगी, तो मुझे दिखाई नहीं गई।”

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस का प्रदर्शन अब तक का सबसे खराब रहा है।

मुख्य प्रवक्ता सावंत ने पार्टी के प्रदर्शन को संतोषजनक बताते हुए कहा कि उनके कार्यकर्ताओं ने दृढ़ संकल्प के साथ संघर्ष किया और सत्ताधारी गठबंधन के दबाव के बावजूद “जीत” हासिल की।

भाषा जितेंद्र सुरेश

सुरेश